Friday, 10 September 2021

लौट के आजा मेरी फुर्र चिरैया

लौट के आजा मेरी 

फुर्र चिरैया

तीज 

फुलहरे का पर्व मनाने ! 


तिनका 

नीड़ नहीं धरना 

तुम खूब चहकना 

आंगन इसी बहाने ! 


उड़ उड़ 

चौरे तुलसी ठौरे 

नीम डरैया 

निमुआं लौंची 

गीत सुना जा,

भीतर उपवास 

अकेली मैना 

पूजा पाठ गुनै न 

संग 

सहेली गुना जा, 


आज का पावन 

परब है निर्जल वाला

आ जा 

फरका धूर नहाने ! 


मंदिर मूरत 

गौरी चरणों का 

बंदन कर 

हल्दी अक्षत 

फूल चढ़ा जा,

गांजा भांग 

धतूरा 

भोग मिठाई 

अर्चन स्तुति कर 

शिव सार पढा जा, 


भक्ति भावना से 

लथ पथ पूरा घर है

अर्ध्य लिये 

में खड़ी मुहाने ! 


रात जागरण 

भक्ति भाव की 

आदि अनंत अनादि 

शक्ति की 

राह दिखा जा,

हरि अनंत

हरि कथा अनंता 

समझे सुने मर्म का 

आरत 

भजन सिखा जा, 


झूम झूम कर 

गा री चिरैया 

मोगरी कोनिया

नाचें भाव सुहाने ! 


भोलानाथ

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