प्यार मिला न गीत मौज का
न मुख कोरस
गाया
बस छूटी हुई कहानी है !
कुछ तो था उन नम आंखों में
आकंठ
अभी तक
डूबी वहीं जवानी है !
खोया ही खोया है
मन मिला नहीं
कुछ
चित्र को मित्र बनाया है,
आंख से आंख का
देखा
सपना
अब तक आंख समाया है,
पल दो पल के उसी मिलन का
झर झर के
अरझा
आंख बिरौनी का पानी है !
उस पार है तू इस पार
हूँ मैं
कैसे देता तुझे सहारा,
गहरी धार की कस्ती
उथले में
डूबी
छू छू सतह किनारा,
घनघोर घुपे बिखरे न बरसे
बिरह पीर की
कायल
काया कसक पुरानी है !
तू नदिया न मैं जल हूँ
दोनों
दूर के
अलग किनारे हैं ,
भरी नदी की बहती
बहर
बिराये
कानो लहरी गुंतारे हैं,
गाने को कुछ शेष कहां है
सूली चढ़ी
मौज की
मुखरित चतुर बयानी है !
भोलानाथ