कुछ मत कह कुहनी कखरी की
चटकी हडियों
अधपक खिचड़ी
निथर निथर बे बाट पड़ी है !
चेत,चबुतरे गाड़ न चिमटा
धूनी धुंध
धुआं के
सम्मोहन से रैयत बहुत बड़ी है !
दूध भात की दिया दिखाते
दौड़ न पीछे
उड़ जाने दे
ले के पिंजरा तेरा नहीं सुआ,
मान ले कहना कोस न आंसू ढार
धीर धर
बिछ स्वागत में
लौटी नैहर छोटी बड़ी बुआ,
टूटे मन की कान में मिश्री
धीरे धीरे
घोल
चुनौती चकरफंद चौगान खड़ी है !
रामद्वार दरबार की पहरेदारी का जिम्मा
मुंह
औंधे गिरा
मलिन मुख किया धरा सब फेल,
राम की नगरी रमे राम की आरत कीरत
ध्यान
दसौना
रामसिया मय जहन जिया न जाने खेल,
विचलित तन मन का भ्रम सधे न साधे
छलकी
आंख
हिदायत वक्ष धूप सी बहुत कड़ी है !
शपथ सिरोही पांव कटें या देह फटे
दोफाड़
जिया
दुशवार समय में दीपक सा जलना है,
विघ्न विनायक किरदार के जैसा
भौदा
भरी लीक में
सधे बैल सा बे पानी पग पग चलना है,
भिन्न भिन्न मत पंथ पीर में
उहापोह की
जीवन
शैली ,नागमणी सी मुकुट जड़ी है !
भोलानाथ
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