Tuesday, 23 July 2013

भोलानाथ के नवगीत [क्या वादा करें आपसे]

मेरे अपने सभी सुधि पाठक ,सुधि श्रोता और नवोदित, वरिष्ठ,तथा मेरे समय साथ के सभी गीतकार,नवगीतकार और साहित्यिक मित्रों को समर्पित आज का यह श्रंगारिक नवगीत
साहित्यिक सावन की पूर्व संध्या की सुन्दरतम बेला में निवेदित कर रहा हूँ !आपकी प्रतिक्रियाएं ही
इस चर्चा और पहल को सार्थक दिशाओं का सहित्यिक बिम्ब दिखाने में सक्षम होंगी !

क्या
वादा करें आपसे
टूटी निभाते कमर
देह दुहरी हुई है !
जुमला सा
सुनते हैं
शिकवा सिकायत
शायद मुहब्बत बहरी हुई है !
भीतर की
मजमूनी पाती
पलकों में
आँखों पढ़ी है,
तराशी है
जीवन भर मूरत
जो कई कई जन्मों गढ़ी है,
सूखी
तलैया सी प्यासी
दरारों में
झिल्ली सी ठहरी हुई है !
क्या
वादा करें आपसे
टूटी निभाते कमर
देह दुहरी हुई है !
जुमला सा
सुनते हैं
शिकवा सिकायत
शायद मुहब्बत बहरी हुई है !
बढाओ कदम आओ
अमुआं की छैयां
भूल जाओ गिले,
और हम गीत गायें वही
काफियों से जैसे
मुखड़े मिले,
कह कह
वेफाई की बातें
पनपी भीतर की
खाई गहरी हुई है !
क्या
वादा करें आपसे
टूटी निभाते कमर
देह दुहरी हुई है !
जुमला सा
सुनते हैं
शिकवा सिकायत
शायद मुहब्बत बहरी हुई है !
फूले क़दम
की डारी
डारे हैं हमने
सावन के झूले,
गीतों की बरखा में
मेघदूत बिरह पत्र
गली घाट भूले.
बिरहाकुल यक्ष की
प्राण बसी यक्षणी
कब साँसों से शहरी हुई है !
क्या
वादा करें आपसे
टूटी निभाते कमर
देह दुहरी हुई है !
जुमला सा
सुनते हैं
शिकवा सिकायत
शायद मुहब्बत बहरी हुई है !

भोलानाथ
डॉराधा कृष्णन स्कूल के बगल में
अन अच्.-७ कटनी रोड मैहर
जिला सतना मध्य प्रदेश .भारत
संपर्क – 8989139763

Monday, 22 July 2013

भोलानाथ के नवगीत [निगाहों में ]

मेरे अपने सभी सुधि पाठक ,सुधि श्रोता और नवोदित, वरिष्ठ,तथा मेरे समय साथ के सभी गीतकार,नवगीतकार और साहित्यिक मित्रों को समर्पित आज का यह श्रंगारिक नवगीत
साहित्यिक सावन की पूर्व संध्या की सुन्दरतम बेला में निवेदित कर रहा हूँ !आपकी प्रतिक्रियाएं ही इस चर्चा और पहल को सार्थक दिशाओं का सहित्यिक बिम्ब दिखाने में सक्षम होंगी !

और आवाहन करता हूँ "हिंदी साहित्य के केंद्रमें नवगीत" के सवर्धन और सशक्तिकरण के विविध आयामों से जुड़ने और सहभागिता निर्वहन हेतु !आपने लेख /और नवगीत पढ़ा मुझे बहुत खुश हो रही है मेरे युवा मित्रों की सुन्दर सोच /भाव बोध /और दृष्टि मेरे भारत माँ की आँचल की ठंडी ठंडी छाँव और सोंधी सोंधी मिटटी की खुशबु अपने गुमराह होते पुत्रों को सचेत करती हुई माँ भारती ममता का स्नेह व दुलार निछावर करने हेतु भाव बिह्वल माँ की करूँणा समझ पा रहे हैं और शनै शैने अपने कर्म पथ पर वापसी के लिए अपने क़दमों को गति देने को तत्..

तुम्हारे साथ
हम रह कर
कभी राँझा कभी मजनूं
नज़र आये निगाहों में !
कभी खुशियाँ
कभी गम के
दिए लेकररहे हम भी
बरसती बूंद बांहों में !
रचा कर
हाथ में मेंहदी
बुलाया आपने सावन
भरा आँचल भरी अंजुरी,
रिझाया आपने
हर पल
छुअन साँसें रचाया खूब
आँगन की खुली देहरी,
ये घूँघट की
जमा पूंजी
चुराते चोर सा हम ही
नज़र आये निगाहों में !
तुम्हारे साथ
हम रह कर
कभी राँझा कभी मजनूं
नज़र आये निगाहों में !
कभी खुशियाँ
कभी गम के
दिए लेकररहे हम भी
बरसती बूंद बांहों में !
बजीं चूड़ी
बजीं पायल
छुआ जब शंख ओंठों ने
मिटीं सब दूरियां,
इबादत इश्क में टूटीं
बाँहों भरी
करुआ कलाई
पीली चूड़ियाँ,
कांच की किरचन
बिछौनों से
उठाते हम अकेले ही
नज़र आये निगाहों में !
तुम्हारे साथ
हम रह कर
कभी राँझा कभी मजनूं
नज़र आये निगाहों में !
कभी खुशियाँ
कभी गम के
दिए लेकररहे हम भी
बरसती बूंद बांहों में !
पियासी प्यार की बरखा
भिगोया देह को जी भर
पावन प्यार की पाती,
अपूजे इस शिवालय में
जली हो रात दिन तुम ही
देह भर बन के दिया बाती,
छुपाकर नाभि में
खुशबू हिरन सा
सूंघते हम ही
नज़र आये निगाहों में !
तुम्हारे साथ
हम रह कर
कभी राँझा कभी मजनूं
नज़र आये निगाहों में !
कभी खुशियाँ
कभी गम के
दिए लेकररहे हम भी
बरसती बूंद बांहों में !

भोलानाथ
डॉराधा कृष्णन स्कूल के बगल में
अन अच्.-७ कटनी रोड मैहर
जिला सतना मध्य प्रदेश .भारत
संपर्क – 8989139763
मेरे अपने सभी सुधि पाठक ,सुधि श्रोता और नवोदित, वरिष्ठ,तथा मेरे समय साथ के सभी गीतकार,नवगीतकार और साहित्यिक मित्रों को समर्पित आज का यह श्रंगारिक नवगीत
साहित्यिक सावन की पूर्व संध्या की सुन्दरतम बेला में निवेदित कर रहा हूँ !आपकी प्रतिक्रियाएं ही इस चर्चा और पहल को सार्थक दिशाओं का सहित्यिक बिम्ब दिखाने में सक्षम होंगी !

और आवाहन करता हूँ "हिंदी साहित्य के केंद्रमें नवगीत" के सवर्धन और सशक्तिकरण के विविध आयामों से जुड़ने और सहभागिता निर्वहन हेतु !आपने लेख /और नवगीत पढ़ा मुझे बहुत खुश हो रही है मेरे युवा मित्रों की सुन्दर सोच /भाव बोध /और दृष्टि मेरे भारत माँ की आँचल की ठंडी ठंडी छाँव और सोंधी सोंधी मिटटी की खुशबु अपने गुमराह होते पुत्रों को सचेत करती हुई माँ भारती ममता का स्नेह व दुलार निछावर करने हेतु भाव बिह्वल माँ की करूँणा समझ पा रहे हैं और शनै शैने अपने कर्म पथ पर वापसी के लिए अपने क़दमों को गति देने को तत्..

तुम्हारे साथ
हम रह कर
कभी राँझा कभी मजनूं
नज़र आये निगाहों में !
कभी खुशियाँ
कभी गम के
दिए लेकररहे हम भी
बरसती बूंद बांहों में !
रचा कर
हाथ में मेंहदी
बुलाया आपने सावन
भरा आँचल भरी अंजुरी,
रिझाया आपने
हर पल
छुअन साँसें रचाया खूब
आँगन की खुली देहरी,
ये घूँघट की
जमा पूंजी
चुराते चोर सा हम ही
नज़र आये निगाहों में !
तुम्हारे साथ
हम रह कर
कभी राँझा कभी मजनूं
नज़र आये निगाहों में !
कभी खुशियाँ
कभी गम के
दिए लेकररहे हम भी
बरसती बूंद बांहों में !
बजीं चूड़ी
बजीं पायल
छुआ जब शंख ओंठों ने
मिटीं सब दूरियां,
इबादत इश्क में टूटीं
बाँहों भरी
करुआ कलाई
पीली चूड़ियाँ,
कांच की किरचन
बिछौनों से
उठाते हम अकेले ही
नज़र आये निगाहों में !
तुम्हारे साथ
हम रह कर
कभी राँझा कभी मजनूं
नज़र आये निगाहों में !
कभी खुशियाँ
कभी गम के
दिए लेकररहे हम भी
बरसती बूंद बांहों में !
पियासी प्यार की बरखा
भिगोया देह को जी भर
पावन प्यार की पाती,
अपूजे इस शिवालय में
जली हो रात दिन तुम ही
देह भर बन के दिया बाती,
छुपाकर नाभि में
खुशबू हिरन सा
सूंघते हम ही
नज़र आये निगाहों में !
तुम्हारे साथ
हम रह कर
कभी राँझा कभी मजनूं
नज़र आये निगाहों में !
कभी खुशियाँ
कभी गम के
दिए लेकररहे हम भी
बरसती बूंद बांहों में !

भोलानाथ
डॉराधा कृष्णन स्कूल के बगल में
अन अच्.-७ कटनी रोड मैहर
जिला सतना मध्य प्रदेश .भारत
संपर्क – 8989139763

चलते चलते अजाने सफर में

चलते चलते अजाने सफर के हारे थके लड़खड़ाने लगे हैं समतल सतह के खुरदरिया पांव! मंजिल का कोई ठिकाना पता न झुकी रीढ़ के बोझ पर बोझ धरती रही ...