Monday, 17 June 2024

गाया गुना न सुनी गाथा उनकी

गाया गुना न सुनी गाथा उनकी 

श्रीमुख के मेले ओठों के झूले 

मनचाहा झूले अकेले

ख्याति की खुशबू झरोखों से आई ! 


मन ऊबा ऊबा उथले में डूबा 

वेदांति कुनबों के ठूंठे  

खन खन चंदन वनों को 

कनफुहियाँ महकी जबरन सुंघाई ! 


भगे भूत लातों के छिनरी जमातों के 

चर्चा के नायक ओढ़े आडम्बर 

तुलसी के चौरे 

कबीरा की लय में शैतानी गाने लगे हैं, 


भाव भजनों की घूंटी पिये मन की गंगाजली 

बाबागीरी न जाने 

शातीर मुखौटों के गिरगिट 

गुरमेटी टेंटे टका के केवल सगे हैं , 


फगुआ के रंग में रंगी व्यास गादी के 

आगे थिरकते 

ढांचों के 

बांकापन में पूरी की पूरी रासलीला समाई ! 


फुरकी में नदियां चुरूओं में सागर 

कखरी सरग सुख 

वैतरणी तारण अवतारी बाबा 

पूंछ बछिया की लहरों में डारे खड़े हैं, 


गील गोबर की गौरी चंदन का लीपा 

शिवालय के बाहर 

रगी की ठगी के संकल्प साधे 

छीनी छुड़ाई उपाधियों की जिद में अड़े हैं , 


गोंईडे की गौंखर की हरियर चरौंखर 

चरी गाय की देखा देखी 

खूंटे की बछिया 

चौकड़ियां भरने को भीतर  रम्हाई ! 


कथनी कथाओं के नवसिखिये वाचक के 

कच्चे जहन की 

कचनारी लपेटों लपट की परख नहीं 

नाहक ही घूर सा सुलग रहा गीला गीला , 


पानी पवन की पगड़ियां उछाले 

न समझे मर्म गीत का 

बड़बोली कुबोली का ठिकरा 

मूड़े मूड़े में फोड़े ख़ाली घड़े सा बाबा हठीला, 


लड़ती हवाओं से जलती दिये की पेंदी में 

पनपी 

सूर्य रथ लगाम थांम साजिस 

उबलती रही खीर सी ठंडी ठंडी कढ़ाई ! 


भोलानाथ

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