तुम्हारे हैं हम या नहीं
निराकार जिंदगी
ताम झाम
कोई इशारे न कर
पहले यह तो बता !
अस्वीकृत समय के
कठिन इस सफर की
गलियों में आना हमारा
शुभ है
सगुन है की कोई खता !
तुम्हारी नजर में सगुन है
यदि तो
चित्तराग अपने
मेरे भी चित में
करने को अंकित
कोई जतन तू ही कर,
जुर्रत खता पर
दुहाई रहम की रिहाई न दे
कर अपने मन की
अमंगल हंसी ही सही
औषधि
पिला या दे दे जहर,
धकियाये नातों के हैं
और धकिया न
कर फैसला
धक धक करता जिया
ढेर करके और न सता !
संसय असंसय के
अधोगति झूले में
सिंगार किये आस्था की
निष्प्राण सजी
मूरत की तरह
अब और न झुला,
अपना के अपना बना ले
उमर से आगे की
मंजिल सफ़र के लिये
या
रातों के देखे
सपनों के जैसे भुला,
मांग ले हमसे सांसें हमारी
दुआ की तरह
दे हमको लिख कर
जिगर में
अपने दिल का पता !
कूड़े सा नाता जग का
जला कर
हारे थके गीत गाते
तुम्हारे
दौड़े चले आये हैं
खुद को कंधों उठाये,
ख्यालों के मंदिर में
करके
प्रतिष्टा तुम्हारी
घड़ियाल घंटे
शंखों की
ध्वनियां सांसों समाये,
कसाले कठिन सह
सिली यह भावों की झोली
ऐसे झटक न
भीख दे या
अपनी नफरत खुल के जता!
भोलानाथ
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