Saturday, 4 September 2021

तू तो सोच अलग कुछ औरों से

 तू तो सोच अलग कुछ औरों से

मठ महंत पद पाने को

दूध सिकहरे 

मठा घोर किरदार मिलेंगे बहुतेरे ! 


साम दंड के भेद भजन में 

बुनती जरी जुगत की सुई सूत सी 

दमड़ी दाम की 

नातेदारी दद्दा भाई फुफेरे! 


मीठा मीठा बेदाम नरी 

पेट फटे तक 

कच्चा पक्का 

स्वाद मिले की सब लीलेंगे,

करू करू सब शेष तुम्हारा 

बेकारण 

फुरसतिया बाबू 

प्याज के जैसे छीलेंगे, 


मंत्र मुखर आडम्बर के 

मायाजाल तिलिस्मी यज्ञ कुण्ड की 

हवन आहूती 

स्वाहा हैं कुश पानी पान के फेरे ! 


इनकी आंखों में 

यही कमेरे है 

बाकी सभी निठल्ले 

जन गोबर गंध डिठौरे हैं, 

अकल के अंधे 

गंजों की बारात में 

ऊंटों की बग्घी में 

बैठे पंडित बौरे हैं, 


गोड़ मिजैया आम खास के 

लिये है सूरज चांद तरैया 

जनता जुगनू खेत मडैया 

खड़ी धूप में रन वन हेरे 


अपनी हाथ हथौड़ी से 

समय शिला पर 

अपने युग निर्माण में 

मर खप वक़्त न जाया कर,

रच इतिहास तू 

संकरी खोल विचारों की 

भीतर से बाहर 

उगल झूठ सच मुह में धर, 


करू करू की बनने दे औषधि  

मीठे खारे का 

स्वाद देख न समय सुमेडी से 

अलग नहीं होने हैं ढेरे ! 


भोलानाथ

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