Friday, 12 April 2013

भोलानाथ के नाव्गीत [दुर्गे आती ही]

मेरे अपने सभी सुधि पाठक ,सुधि श्रोता और नवोदित, वरिष्ठ,तथा मेरे समय साथ के सभी गीतकार,नवगीतकार और साहित्यिक मित्रों के स्नेहस्वरूप आज से
नवरात्रि की पवन बेला माँ शारदा का अभीषेक अपने नवगीतों से माँ के श्री चरणों का वंदन करते हुए इस यज्ञ का श्री गणेश कर रहा हूँ !आपकी प्रतिक्रियाएं और लाड ,प्यार, दुलार के साथ मुझे आप सभी मित्रों के स्नेहाशीष की विशेष आवश्यकता होगी आशा करता हूँ सभी मित्र मेरे इस अनुष्ठान को संपन्न होने तक मुझे अपने संबल से ओत प्रोत करते रहेगे !.........भोलानाथ

दुर्गेआती है
हो ,,,,,,, हो,,,, हो .... हो .........
दुर्गे आती है 
हमें बुलाती है 
माँ महिमा गाते हैं, 
तुम्हें बुलाते हैं !
दुर्गे आती है 
पूछे जाती है 
की महिमा गाओगे, 
कहो कब आओगे, 
भजन बिन मंदिर सुना सुना है !
माँ महिमा गाते हैं 
तुम्हें बुलाते हैं !
दुर्गे आती है 
पूछे जाती है 
कहो कब आओगे, 
की महिमा गाओगे
भजन बिन मंदिर सूना सूना है ! 
माँ दर वाली ने, 
माँ वरवाली ने, 
कुछ हमसे कहा है,
कुछ हमसे पूछा है, 
माँ की सांसों ने, 
लरजती आँखों ने, 
माँ के गज़रे ने, 
माँ के कजरे ने,
फैली बांहों ने, 
माँ की आँहों ने, 
चांदनी रातों ने, 
माँ की बातों ने,
तरसती आँखों ने, 
लरजती साँसों ने, 
और पूछा मयूरी पाँखों ने !
कहो कब आओगे, 
महिमा गाओगे,
भजन बिन मंदिर सूना सूना है !
पहाड़ी वाली ने, 
मैहर वाली ने, 
कुछ हमसे कहा है, 
कुछ हमसे पूछा है ,
तुम्हारे भगतों ने, 
गज़ल के मक्तों ने,
पुराने बरगद ने, 
हाथ की आमद ने,
खेत खलिहानों ने, 
उड़द के दानों ने, 
हाथ के ठेलों ने, 
माँ के मेलों ने, 
काठ के झूलों ने, 
महकती फूलों ने, 
और पूछा है फूल की कलियों ने ! 
कहो कब आओगे, 
महिमा गाओगे, 
भजन बिन मंदिर सूना सूना है !
हो,,,,,,,,,, हो ,,,,,, हो ....... हो.,,,,,

भोलानाथ

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