Friday, 26 April 2013

भोलानाथ के नवगीत [अंधेरों का मारा]

मेरे अपने सभी सुधि पाठक ,सुधि श्रोता और नवोदित, वरिष्ठ,तथा मेरे समय साथ के सभी गीतकार,नवगीतकार और साहित्यिक मित्रों को समर्पित आज का यह नया नवगीत विद्रूप यथार्थ की धरातल पर सामाजिक व्यवस्था और प्रबंधन की चरमराती लचर तानाशाही के कुरूप चहरे की मुक्म्मल बदलाव की जरूत महसूस करता हुआ नवगीत !
साहित्यिक संध्या की सुन्दरतम की पूर्व बेला में निवेदित कर रहा हूँ !आपकी प्रतिक्रियाएं ही इस चर्चा और पहल को सार्थक दिशाओं का सहित्यिक बिम्ब दिखाने में सक्षम होंगी !

और आवाहन करता हूँ "हिंदी साहित्य के केंद्रमें नवगीत" के सवर्धन और सशक्तिकरण के विविध आयामों से जुड़ने और सहभागिता निर्वहन हेतु !आपने लेख /और नवगीत पढ़ा मुझे बहुत खुश हो रही है मेरे युवा मित्रों की सुन्दर सोच /भाव बोध /और दृष्टि मेरे भारत माँ की आँचल की ठंडी ठंडी छाँव और सोंधी सोंधी मिटटी की खुशबु अपने गुमराह होते पुत्रों को सचेत करती हुई माँ भारती ममता का स्नेह व दुलार निछावर करने हेतु भाव बिह्वल माँ की करूँणा समझ पा रहे हैं और शनै शैने अपने कर्म पथ पर वापसी के लिए अपने क़दमों को गति देने को तत्...


अंधेरों का
मारा
सूरज बिचारा
पी लेगा
लगता है
बूंद बूंद नदियाँ !
झरनों
तलैयाँ
काबिज बिलैयाँ
बस्तों में
कूप छुपे
खजुआते गदियाँ !  
बेंच कर सितारे
नीले
आकाश को
अमावस
की गोद में
सोई है जोंधैया,
खा खा अंगारे
इंतज़ार भोर का
दूर हुई ढिबरी
प्यासी है
खूंटे की गैया,
चंद्रमुखी
वादे
पीठों में लादे
सागर में
चरवाहे
फोड़ रहे अखियाँ !
 अंधेरों का
मारा
सूरज बिचारा
पी लेगा
लगता है
बूंद बूंद नदियाँ !
झरनों
तलैयाँ
काबिज बिलैयाँ
बस्तों में
कूप छुपे
खजुआते गदियाँ !  
बरगद के नीचे
पनपे बबूलों के
संबोधन
सुनो नहीं
जडमूंल से उखाड़ो,  
दूध धोये कांटे
छेदेंगे ऐंडियाँ
खोद कर
खादनियाँ
पुरसा भर गाडो, 
ऊगे न
दुबारा
कोई लम्यारा
उखारे पछारे
उधेरे न
छैयां की बखियाँ  !
अंधेरों का
मारा
सूरज बिचारा
पी लेगा
लगता है
बूंद बूंद नदियाँ !
झरनों
तलैयाँ
काबिज बिलैयाँ
बस्तों में
कूप छुपे
खजुआते गदियाँ !  
कब तक
जिओगे दमघोटू
गुमनामी का जीवन
कितना पियोगे
नाँदों का माठा,
कूटेंगे धर्मी
निकारेंगे
महुआ का स्यासा
बनायेंगे
लडुओं का लाठा,
बैसाखी
कंधे
सावन के अंधे
ढोते विरासत
बीती हैं
नकुओं में शदियाँ !
अंधेरों का
मारा
सूरज बिचारा
पी लेगा
लगता है
बूंद बूंद नदियाँ !
झरनों
तलैयाँ
काबिज बिलैयाँ
बस्तों में
कूप छुपे
खजुआते गदियाँ !  



भोलानाथ
डॉराधा कृष्णन स्कूल के बगल में
अन अच्.-७ कटनी रोड मैहर
जिला सतना मध्य प्रदेश .भारत
संपर्क – 8989139763


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