Monday, 22 April 2013

छंद प्रसंग

छंद प्रसंग
मेरे अपने सभी सुधि पाठक ,सुधि श्रोता और नवोदित, वरिष्ठ,तथा मेरे समय साथ के सभी गीतकार,नवगीतकार और साहित्यिक मित्रों को समर्पित आज का यह नया नवगीत विद्रूप यथार्थ की धरातल पर सामाजिक व्यवस्था और प्रबंधन की चरमराती लचर तानाशाही के कुरूप चहरे की मुक्म्मल बदलाव की जरूत महसूस करता हुआ नवगीत !
साहित्यिक संध्या की सुन्दरतम की पूर्व बेला में निवेदित कर रहा हूँ !आपकी प्रतिक्रियाएं ही इस चर्चा और पहल को सार्थक दिशाओं का सहित्यिक बिम्ब दिखाने में सक्षम होंगी !

और आवाहन करता हूँ "हिंदी साहित्य के केंद्रमें नवगीत" के सवर्धन और सशक्तिकरण के विविध आयामों से जुड़ने और सहभागिता निर्वहन हेतु !आपने लेख /और नवगीत पढ़ा मुझे बहुत खुश हो रही है मेरे युवा मित्रों की सुन्दर सोच /भाव बोध /और दृष्टि मेरे भारत माँ की आँचल की ठंडी ठंडी छाँव और सोंधी सोंधी मिटटी की खुशबु अपने गुमराह होते पुत्रों को सचेत करती हुई माँ भारती ममता का स्नेह व दुलार निछावर करने हेतु भाव बिह्वल माँ की करूँणा समझ पा रहे हैं और शनै शैने अपने कर्म पथ पर वापसी के लिए अपने क़दमों को गति देने को तत्...
देखा नहीं 
अब तक
ऐसी छवियाँ 
विलावों की !
पकडती हैं 
जब तब
लोमड़ी 
मछलियाँ तलवों की !
फिर भी 
घर के अन्दर का
सुन्दर नज़ारा है,
मेहनत कस 
आदमी का
सडक पर गुजारा है,
ठण्ड में ठिठुरते 
सुनता है
किस्से 
कहानी अलावों की !
देखा नहीं 
अब तक
ऐसी छवियाँ 
विलावों की !
पकडती हैं 
जब तब
लोमड़ी 
मछलियाँ तलवों की !
मेरे या 
औरों के कहने से
क्या होगा,
बदलेगी 
सोच उतरेगा
किस्मत का चोंगा,
सदियों से 
देख रहे 
लोग बाग़
चमकती 
पूंछें छलावों की !
देखा नहीं 
अब तक
ऐसी छवियाँ 
विलावों की !
पकडती हैं 
जब तब
लोमड़ी 
मछलियाँ तलवों की !
भारी भरकम हैं 
रुढियों के
ऊँचे टीले,
खेमों में 
बटे हुए 
लड़ रहे
कबसे कबीले,
खेतों की 
खबर नहीं
अख़बारों में होती हैं 
बातें पलावों की !
देखा नहीं 
अब तक
ऐसी छवियाँ 
विलावों की !
पकडती हैं 
जब तब
लोमड़ी 
मछलियाँ तलवों की


भोलानाथ
डॉ,राधा कृष्णन स्कूल के बगल में
अन अच्.-७ कटनी रोड मैहर , 
जिला सतना मध्य प्रदेश .भारत
संपर्क -०9425885234,8989139763

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