Saturday, 6 April 2013

भोलानाथ के नवगीत [पता क्या पूंछेंगी नदियाँ]

मेरे अपने सभी सुधि पाठक ,सुधि श्रोता और नवोदित, वरिष्ठ,तथा मेरे समय साथ के सभी गीतकार,नवगीतकार और साहित्यिक मित्रों को समर्पित आज का यह नया गीत विद्रूप यथार्थ की धरातल पर सामाजिक व्यवस्था और प्रबंधन की चरमराती लचर तानाशाही के कुरूप चहरे की मुक्म्मल बदलाव की जरूत महसूस करता हुआ नवगीत !
साहित्यिक संध्या की सुन्दरतम बेला में निवेदित कर रहा हूँ !आपकी प्रतिक्रियाएं ही इस चर्चा और पहल को सार्थक दिशाओं का सहित्यिक बिम्ब दिखाने में सक्षम होंगी !

और आवाहन करता हूँ "हिंदी साहित्य के केंद्रमें नवगीत" के सवर्धन और सशक्तिकरण के विविध आयामों से जुड़ने और सहभागिता निर्वहन हेतु !आपने लेख /और नवगीत पढ़ा मुझे बहुत खुश हो रही है मेरे युवा मित्रों की सुन्दर सोच /भाव बोध /और दृष्टि मेरे भारत माँ की आँचल की ठंडी ठंडी छाँव और सोंधी सोंधी मिटटी की खुशबु अपने गुमराह होते पुत्रों को सचेत करती हुई माँ भारती ममता का स्नेह व दुलार निछावर करने हेतु भाव बिह्वल माँ की करूँणा समझ पा रहे हैं और शनै शैने अपने कर्म पथ पर वापसी के लिए अपने क़दमों को गति देने को तत्पर है!.....

पता क्या
पूंछेंगी
नाविक
से नदियाँ
बीत गईं शदियाँ
बाढ़ों में धसके किनारे !
घाटों के
हरे भरे
आकाशी कहुये
कगारों के महुये
गुलर की
छईयों के गायब नज़ारे !
झुक झुक कर
छूतीं
जलधारा
कूम्हीं की डरैयाँ,
चौकड़ियाँ
भरती
ज्यों बछियाँ
बाँधे गिरैयाँ,
उबलती
उफनाती
अदहन
सी लहरें
आँखों न ठहरें
आवेगी धारा भँवरों के मारे !
पता क्या
पूंछेंगी
नाविक
से नदियाँ
बीत गईं शदियाँ
बाढ़ों में धसके किनारे !
घाटों के
हरे भरे
आकाशी कहुये
कगारों के महुये
गूलर की
छईयों के गायब नज़ारे !
अड़ते
अचानक
प्रवाहों के आगे
पतझरिया घोड़े,
जाने
पहचाने न
पानी की ताकत
बालू हैं रोड़े ,
गीत के
पखेरू
ओंठों में उतरे
कंठों में गहरे
डुबकियाँ
लगाये लय के सहारे !
पता क्या
पूंछेंगी
नाविक
से नदियाँ
बीत गईं शदियाँ
बाढ़ों में धसके किनारे !
घाटों के
हरे भरे
आकाशी कहुये
कगारों के महुये
गुलर की
छईयों के गायब नज़ारे !
कगारों से
जब तब
दहारों में
कूदें गुलरियाँ,
पानी में
रहकर
धुलती नहीं हैं
रानी मछरियाँ,
दल दल में
औंधी
काठ की कठौती
ठाँठों पटौती
डूबे हैं
जब तब गहरे शिंकारे !
पता क्या
पूंछेंगी
नाविक
से नदियाँ
बीत गईं शदियाँ
बाढ़ों में धसके किनारे !
घाटों के
हरे भरे
आकाशी कहुये
कगारों के महुये
गुलर की
छईयों के गायब नज़ारे !

भोलानाथ
डॉराधा कृष्णन स्कूल के बगल में
अन अच्.-७ कटनी रोड मैहर
जिला सतना मध्य प्रदेश .भारत
संपर्क – 8989139763

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