Thursday, 11 April 2013

हंस फरवरी 2013 "हिंदी सिनेमा के सौ साल" | शब्दांकन #Shabdankan

हंस फरवरी 2013 "हिंदी सिनेमा के सौ साल" | शब्दांकन #Shabdankan


मेरे अपने सभी सुधि पाठक ,सुधि श्रोता और नवोदित, वरिष्ठ,तथा मेरे समय साथ के सभी गीतकार,नवगीतकार और साहित्यिक मित्रों के स्नेहस्वरूप आज से
नवरात्रि की पवन बेला माँ शारदा का अभीषेक अपने नवगीतों से माँ के श्री चरणों का वंदन करते हुए इस यज्ञ का श्री गणेश कर रहा हूँ !आपकी प्रतिक्रियाएं और लाड ,प्यार, दुलार के साथ मुझे आप सभी मित्रों के स्नेहाशीष की विशेष आवश्यकता होगी आशा करता हूँ सभी मित्र मेरे इस अनुष्ठान को संपन्न होने तक मुझे अपने संबल से ओत प्रोत करते रहेगे !.........भोलानाथ

दुर्गेआती है
हो ,,,,,,, हो,,,, हो .... हो .........
दुर्गे आती है 
हमें बुलाती है 
माँ महिमा गाते हैं, 
तुम्हें बुलाते हैं !
दुर्गे आती है 
पूछे जाती है 
की महिमा गाओगे, 
कहो कब आओगे, 
भजन बिन मंदिर सुना सुना है !
माँ महिमा गाते हैं 
तुम्हें बुलाते हैं !
दुर्गे आती है 
पूछे जाती है 
कहो कब आओगे, 
की महिमा गाओगे
भजन बिन मंदिर सूना सूना है ! 
माँ दर वाली ने, 
माँ वरवाली ने, 
कुछ हमसे कहा है,
कुछ हमसे पूछा है, 
माँ की सांसों ने, 
लरजती आँखों ने, 
माँ के गज़रे ने, 
माँ के कजरे ने,
फैली बांहों ने, 
माँ की आँहों ने, 
चांदनी रातों ने, 
माँ की बातों ने,
तरसती आँखों ने, 
लरजती साँसों ने, 
और पूछा मयूरी पाँखों ने !
कहो कब आओगे, 
महिमा गाओगे,
भजन बिन मंदिर सूना सूना है !
पहाड़ी वाली ने, 
मैहर वाली ने, 
कुछ हमसे कहा है, 
कुछ हमसे पूछा है ,
तुम्हारे भगतों ने, 
गज़ल के मक्तों ने,
पुराने बरगद ने, 
हाथ की आमद ने,
खेत खलिहानों ने, 
उड़द के दानों ने, 
हाथ के ठेलों ने, 
माँ के मेलों ने, 
काठ के झूलों ने, 
महकती फूलों ने, 
और पूछा है फूल की कलियों ने ! 
कहो कब आओगे, 
महिमा गाओगे, 
भजन बिन मंदिर सूना सूना है !
हो,,,,,,,,,, हो ,,,,,, हो ....... हो.,,,,,

भोलानाथ








मेरे अपने सभी सुधि पाठक ,सुधि श्रोता और नवोदित, वरिष्ठ,तथा मेरे समय साथ के सभी गीतकार,नवगीतकार और साहित्यिक मित्रों के स्नेहस्वरूप आज से 
नवरात्रि की पवन बेला माँ शारदा का अभीषेक अपने नवगीतों से माँ के श्री चरणों का वंदन करते हुए इस यज्ञ का श्री गणेश कर रहा हूँ !आपकी प्रतिक्रियाएं और लाड ,प्यार, दुलार के साथ मुझे आप सभी मित्रों के स्नेहाशीष की विशेष आवश्यकता होगी आशा करता हूँ सभी मित्र मेरे इस अनुष्ठान को संपन्न होने तक मुझे अपने संबल से ओत प्रोत करते रहेगे !.........भोलानाथ 

माँ आँचल में अपने छुपा लो 
माँ आँचल में अपने छुपा लो,अंचल में अपने छुपा लो !
डरते हैं हम हो ना जायें, दूर तुमसे हो ना जायें !
भेंट मेरी चरण से लगा लो,
माँ पास हमको बुलालो,अंचल में अपने छुपा लो !
डरते हैं हम हो ना जायें, दूर तुमसे हो ना जायें !
भेंट मेरी चरण से लगा लो,
माँ पास हमको बुलालो,अंचल में अपने छुपा लो !
आआआआआ ल्लल्लल आआआ..ल्लल्लल आआआआ
चुनरी लहरा दो, आँचल फहरा दो,
ममता का सागर घरमें लहरा दो,
माँ आँचल तो फहरा दे,हवा न आंधी हो जाये !
माँ ममता तो लहरा दे, बूँद न सागर हो जाये !
होने दो उनको सागर,भरनी है हमको गागर,
भेंट मेरी चरण से लगा लो,
माँ पास हमको बुलालो,अंचल में अपने छुपा लो !
डरते हैं हम हो ना जायें, दूर तुमसे हो ना जायें !
भेंट मेरी चरण से लगा लो,
माँ पास हमको बुलालो,अंचल में अपने छुपा लो !
आआआआआ ...ल्लल्लल आआआ ल्लल्लल आआआआ
वंदन करते हैं,फूल चढ़ायेंगे !
दर पर आये हैं,दर्शन पायेंगे !
लेकर तिलक तर्जनी से,तुम इस मांग जरा धर दो,
कौन पढ़े किस्मत की रेखा,मंशा पूर्ण आज कर दो,
होना हो माँ राजी हम राजी 
भेंट मेरी चरण से लगा लो,
माँ पास हमको बुलालो,अंचल में अपने छुपा लो !
डरते हैं हम हो ना जायें, दूर तुमसे हो ना जायें !
भेंट मेरी चरण से लगा लो,
माँ पास हमको बुलालो,अंचल में अपने छुपा लो !
डरते हैं हम हो ना जायें, दूर तुमसे हो ना जायें !
भेंट मेरी चरण से लगा लो,
माँ पास हमको बुलालो,अंचल में अपने छुपा लो !
डरते हैं हम हो ना जायें, दूर तुमसे हो ना जायें !
भेंट मेरी चरण से लगा लो,
माँ पास हमको बुलालो,अंचल में अपने छुपा लो !
आआआआआ ...ल्लल्लल आआआ ल्लल्लल आआआआ

भोलानाथ

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