आपा धापी
मसखरी मुखौटा
ताजोतख्त के सपने !
स्वांग नहाये
संदर्भी तीतर
भीतर लगे पनपने !
तानाशाह शिखंडी
बंदूकों की घनी छाँव में
कुम्भ नहाकर लौटे,
मीरा मर्म की गंगा
भरी जवानी खडी पूतना
खाली पानी औंटे,
तीरथ बरथ
घाट छोड़कर
तक्षक के घर लगे रपकने !
आपा धापी
मसखरी मुखौटा
ताजोतख्त के सपने !
स्वांग नहाये
संदर्भी तीतर
भीतर लगे पनपने !
धर्म ध्वजाओं की मर्यादा
चौराहों पर
मदिरा बोतल फूटी.
साख सूख गई कौओं के घर
बौरी कोयल
लाचारी में टूटी,
भरी कूच
महुये का जंगल
पतरोई पर लगा टपकने !
आपा धापी
मसखरी मुखौटा
ताजोतख्त के सपने !
स्वांग नहाये
संदर्भी तीतर
भीतर लगे पनपने !
शोहरती पहाड़ों के
शिखरों पर
कूद रहे हैं बंदरों जैसे बौने.
कौड़ी कौड़ी बेच रहे
पुरखों की प्रभुसत्ता
रह रह के औने पौने,
पितामह का बाहुबल
बचन बद्ध
अनायास लगा कंपने !
आपा धापी
मसखरी मुखौटा
ताजोतख्त के सपने !
स्वांग नहाये
संदर्भी तीतर
भीतर लगे पनपने !
भोलानाथ
डॉ,राधा कृष्णन स्कूल के बगल में
अन अच्.-७ कटनी रोड मैहर
,जिला सतना मध्य प्रदेश .भारत
संपर्क -09425885234
No comments:
Post a Comment