क्षणजीवी
उपदेशों की झड़ी लगी है
व्यास बखानी सावन बरखा
पौली फागुन ओंठ बताशे
मछुआरों के जाल !
जलजीवी
अनजान मछलियाँ
छल छद्मों की बंधी धार में
चारे की अभिलाषा
खींच रही है चीकन चांदन खाल !
ठाढ़ तिलक
मगरे के माथे
मधुर बयानी
गहराई में उथले झांके
ठंडी पूंछ गर्म हैं खूनी जबड़े,
बैठ किनारे
आँखें गाड़े
चोंच खुजाते चरके बगुले
छोटी चिनगी मुंड छिपाने
काई कांदो गवडे,
फटी फतोंहीं टूटे चश्मे
हाथ काटती जीवन रेखा
डोचकी से तोचक गए हैं
कल्लू काका के कलमी से गाल !
क्षणजीवी
उपदेशों की झड़ी लगी है
व्यास बखानी सावन बरखा
पौली फागुन ओंठ बताशे
मछुआरों के जाल !
जलजीवी
अनजान मछलियाँ
छल छद्मों की बंधी धार में
चारे की अभिलाषा
खींच रही है चीकन चांदन खाल !
बहुरूपियों के रूप निराले
जन्मों का लेखा
ठग विद्या के पड़े हैं पाले
देह धर्म का
रंग हुआ हर कोना,
वैतरणी का नाम सुना है
निर्वाषित सौगंध सांस की
संशय में अहसास
प्यास के
अनजान फैसला ढोना,
जीवन का मधुमास गुलाबी
पी पी पानी
भदैला उरदे जैसा चटका
छलकी गघरी भींगा आँचल
पनघट हैं बेहाल !
क्षणजीवी
उपदेशों की झड़ी लगी है
व्यास बखानी सावन बरखा
पौली फागुन ओंठ बताशे
मछुआरों के जाल !
जलजीवी
अनजान मछलियाँ
छल छद्मों की बंधी धार में
चारे की अभिलाषा
खींच रही है चीकन चांदन खाल !
धुली चांदनी आँखें फूटीं
जन्मों की टकटकी थकी
चकवा चकवी
धरे क्षितिज
प्राण प्रीत की थाती,
झूठ मूठ का जीवन जाया
गुरु बंदना शंख फूंकते
मेढी खलिहान
जलाकर खेत से
लौटा छोटा नाती,
उजड़े नगर तिलिस्मी
उल्लू रंग बदलते
मूंड मुड़ाकर गिनती सीखें
विश्वामित्र बनेंगे
गिन गिन अपने सिर के बाल !
क्षणजीवी
उपदेशों की झड़ी लगी है
व्यास बखानी सावन बरखा
पौली फागुन ओंठ बताशे
मछुआरों के जाल !
जलजीवी
अनजान मछलियाँ
छल छद्मों की बंधी धार में
चारे की अभिलाषा
खींच रही है चीकन चांदन खाल !
भोलानाथ
डॉ,राधा कृष्णन स्कूल के बगल में
अन अच्.-७ कटनी रोड मैहर
,जिला सतना मध्य प्रदेश .भारत
संपर्क -09425885234
No comments:
Post a Comment