प्राची कैसी
बेला लाई रे
आई है तन्हाई रे !
सूरज चाँद
वही हैं और चमकते वही सितारे !
सुर्ख सुनहरी
चुप्पी छाई रे
मिटती नहीं मिटाई रे!
धरती अम्बर
बोध दिशायें हैं गुल्लों के मारे !
फफरी लगे हैं
ओंठ गुलाबी
कलफ बैगनी
केश चमकते
घुनी याद के जाल,
भेंट दुपहरी
ऊबी ऊबी
चढ़ी चाशनी
अनचीन्हीं सी बातें
चितवन धरे सवाल,
तिरछीं आँख
बिजुरिया भाई रे
पत्र लिखें जमुहाई रे !
कस्तूरी जैसी
धूप हिरानी हेर हेर हम हारे !
प्राची कैसी
बेला लाई रे
आई है तन्हाई रे !
सूरज चाँद
वही हैं और चमकते वही सितारे !
सुर्ख सुनहरी
चुप्पी छाई रे
मिटती नहीं मिटाई रे!
धरती अम्बर
बोध दिशायें हैं गुल्लों के मारे !
भौरों बाग़
बिराने
हो गये
द्वारपाल हैं
छत्तों भरीं डँटईयाँ,
सुई चुभोते
डंक दंश अब
विज्ञापित
मुस्कान बसंती
घायल हुईं डरईयाँ.
फूल नहीं
पुरी है काई रे
गंध छुपी है खाई रे !
उलझी यादें
जहन से अब तो सूरजमुखी उतारे !
प्राची कैसी
बेला लाई रे
आई है तन्हाई रे !
सूरज चाँद
वही हैं और चमकते वही सितारे !
सुर्ख सुनहरी
चुप्पी छाई रे
मिटती नहीं मिटाई रे!
धरती अम्बर
बोध दिशायें हैं गुल्लों के मारे !
जन्म जन्म
मधुमास
कोयलिया
साँस प्रहर के
क्षितिज सूर्य से बंधे हैं नाते,
दुधमुंही
किरण
अधरों से उजड़ी
यश वेदी पर
कौन सिंधौरा तर्कुटी सजाते,
रह रह
सूख गई अमराई रे
हो गई पर्वत राई रे !
फुनगी छोड़
हुये परदेशी रंगीन पंखेरू सारे !
प्राची कैसी
बेला लाई रे
आई है तन्हाई रे !
सूरज चाँद
वही हैं और चमकते वही सितारे !
सुर्ख सुनहरी
चुप्पी छाई रे
मिटती नहीं मिटाई रे!
धरती अम्बर
बोध दिशायें हैं गुल्लों के मारे !
भोलानाथ
डॉ,राधा कृष्णन स्कूल के बगल में
अन अच्.-७ कटनी रोड मैहर
,जिला सतना मध्य प्रदेश .भारत
संपर्क -09425885234
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