Friday, 28 May 2021

चाहता हूं मैं भी

 <script data-ad-client="ca-pub-1507049022138382" async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js"></script>चाहता हूँ 

मै भी 

सावन सा बरसना 

चिलचिलाती धूप की 

सुन्दर सुनहरी 

देह को 

जीभर भिगाने  !

फिर देखता हूँ 

बादलों का 

काफिला 

प्यासा बहुत 

सुस्ता रहा है 

सरकारी 

अस्पतालों के मुहाने !

छोटी तलैया के 

छोटे शिवालय में 

अर्ध दे खड़ी हो

बौराया बादाम 

फुलवारी 

देख कर तुम्हारी, 

तलैया के पीछे 

सघन  वन फूला 

घेरे में बगिया  

नीले कमल हैं  

लचकी है पीछे 

अमुआं की डारी,

जलती दुपहरी  

सूर्य मुखी 

फूलों का जत्था 

चाह रहा दिन में 

चंदा को देखना 

छाँव के बहाने !

चाहता हूँ 

मै भी 

सावन सा बरसना 

चिलचिलाती धूप की 

सुन्दर सुनहरी 

देह को 

जीभर भिगाने  !

फिर देखता हूँ 

बादलों का 

काफिला 

प्यासा बहुत 

सुस्ता रहा है 

सरकारी 

अस्पताल के मुहाने !


भोलानाथ

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