Thursday, 27 May 2021

सूरज को दिया दिखाने के ठेके जिन्हें मिले !

 सूरज को 

दिया दिखाने के 

ठेके  जिन्हें मिले !

नौ मन तेल 

जुटाने में 

टूटे बुर्ज बिके है किले !

पायल बजी 

न राधा नाची 

स्वीकृत होने की 

रही अकथ कहानी,

पनपी रीति रिवाजें 

कितनी 

आईं गईं लीक के 

बाहर छोड़ निसानी,

गई भैंस पानी में 

जैसे

फिरें बरेदी जिले जिले !

धर्म सभ्यता के 

सारे सूत्र सही थे 

इसीलिये 

माटी में बचे रहे,

छुद्र नदी से 

कितने 

नाले परनाले उमड़े 

तिलक लिलारे रचे रहे,

खता जिये 

लम्हों के भीतर 

सूर्यमुखी से सदा खिले  !

धीरज साहस 

शील आचरण 

बरगद जैसे 

कटते उलहते छायादार हुये,

पौ परी 

सुहानी सुबह के जैसे 

सुगढ़ मसौदों के 

हर पल हकदार हुये,

छोड़ मंत्रणा 

घंटी वाली 

चूहे खोद रहे हैं बिले  ! 


भोलानाथ

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