Monday, 29 December 2025

हमको सजा देने वाले,

हमको सजा देने वाले, हथेली चढ़ी
यह मेंहदी की रंगत
रह रह दिखा न
पुस्तैनी मसनद नहीं है तुम्हारी !
पुस्तैनी मसनद नहीं है तुम्हारी !
            आजाद हम हैं निराले
            हमको सजा देने वाले !

अपने गुनाहों की कालिख लिलारे
लगा न
प्रपंची हवाओं की
सह पा के बेरों ने मूड़े की पगड़ी उतारी !
            पुस्तैनी मसनद नहीं है तुम्हारी!                                                   भ्रामक मंसूबे पाले
                       हमको सजा देने वाले !

परैयों का पारा नहीं है कजरौटी अमाया
यह बासी काजल
लगा दाग
बे पानी छूटेगा कैसे धोई धवल लोई का,

चूसी चबाई गडेरी का चौके में बगरा है
छीलन
रमी चींटियां हैं
समझेंगी क्या आंधियां दर्द पतरोई का,

उज्जैनी के तारतम्य स्वांगों ने
तर्कों के बूते
क्षिप्रा के घाटों की
अलका सी रौनक हंस हंस उजारी !
      पुस्तैनी मसनद नहीं है तुम्हारी !
                मत फेंक बे घाट जाले
                हमको सजा देने वाले !

उलटी दिशा में मोड़ नहीं बसी भूत
प्यास के बहने दे नदियां
निश्चित गंतव्य में
मन ही गंगोत्री सा उदगम उदगार है,

बे मेल छोरों के बंधन लिये, फेरों सा
मन के अनुबंध नहीं होने हैं
केवल
छद्मी तजुरबों का छना हुआ व्यापार है,

साबित करें कैसे सच तू ही बता
जतवों का पीसा
कलेवा में राँधा
बचा खुचा बासी है रात की बियारी !
       पुस्तैनी मसनद नहीं है तुम्हारी !
               हंडिया क्या कुछ उबाले
                  हमको सजा देने वाले !

ऊंचे उड़ते अहम की खुमारी लिये
किये पाप तुमने जो
दाखिल किया क्या कोई व्यौरा यहां
या मुकर्रर किया है कोई सजा,

हम से ज्यादा गुनहगार तू है हमारी खता
आत्म रक्षा की थी
चूक तुमसे कैसे हुई
पास तेरे थी सबसे ऊंची ध्वजा,

धमकी धमनियों में रख अपने,घुड़की के
आदी नहीं हैं
लक्ष्मण के
किरदार में रात वन की अकेले गुजारी !
          पुस्तैनी मसनद नहीं है तुम्हारी !
                      देखे अधम गोरे काले
                      हमको सजा देने वाले !


भोलानाथ 

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