Monday, 29 December 2025

केहि विधि पूजूं

केहि विधि पूजूं कुछ जतन
बता दे
समझ परे न कछु
जहन जगा झट माई रे !
                 ओ माई रे !

होम हवन के मन्त्र न जानूं
पूजन अर्चन
वैदिक
विधि सम्मति गहराई रे !
                 ओ माई रे !

कष्टों के अम्बार लगे हैं
दिन अब वो न रहे
बहुत सहा
कुछ कहा नहीं दर तेरे,

शक्ति नहीं है भक्ति की
मुझमे
अधीर हृदय है
हौले हौले उतरे आंख अंधेरे,

गंगा नहलाऊं या चुनरी
ले
आऊं
पग पांव जले परछाईं रे !
                   ओ माई रे !

दे के दरश क्यों दूर हुई है
आशीर्वचन
धरोहर
झंझाओं में उजड़ी है,

पतरोई सा उड़े तुम्हारी
छाया से
त्रुटियों के पुतले
स्वीकार क्षमा मा खड़ी है,

बादल सा बरस एक बार
झमाझम
उल्ह हरी हो
यह जीवन की अमराई रे !
                    ओ माई रे !

मां तेरे मुखड़े के आछादित
आलोक के
आलोकित
वह खप्पर खड्ग नहीं बिसरा,

बस विनय प्रार्थना चरणों में
है इतनी 
आलोकित कर
दिल जैसे गजल का मिसरा,

पांय परों कर जोरि कहौं
फिर
फिर
अइयो जस नवरतियों में आई रे !
                             ओ माई रे !

भोलानाथ 

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