Sunday, 5 May 2013

भोलानाथ के नवगीत [कौन घिस घिस कसेगा]

मेरे अपने सभी सुधि पाठक ,सुधि श्रोता और नवोदित, वरिष्ठ,तथा मेरे समय साथ के सभी गीतकार,नवगीतकार और साहित्यिक मित्रों को समर्पित आज का यह नया नवगीत विद्रूप यथार्थ की धरातल पर सामाजिक व्यवस्था और प्रबंधन की चरमराती लचर तानाशाही के कुरूप चहरे की मुक्म्मल बदलाव की जरूत महसूस करता हुआ नवगीत !
साहित्यिक संध्या की सुन्दरतम नवरात्रि की पूर्व बेला में निवेदित कर रहा हूँ !आपकी प्रतिक्रियाएं ही इस चर्चा और पहल को सार्थक दिशाओं का सहित्यिक बिम्ब दिखाने में सक्षम होंगी !

और आवाहन करता हूँ "हिंदी साहित्य के केंद्रमें नवगीत" के सवर्धन और सशक्तिकरण के विविध आयामों से जुड़ने और सहभागिता निर्वहन हेतु !आपने लेख /और नवगीत पढ़ा मुझे बहुत खुश हो रही है मेरे युवा मित्रों की सुन्दर सोच /भाव बोध /और दृष्टि मेरे भारत माँ की आँचल की ठंडी ठंडी छाँव और सोंधी सोंधी मिटटी की खुशबु अपने गुमराह होते पुत्रों को सचेत करती हुई माँ भारती ममता का स्नेह व दुलार निछावर करने हेतु भाव बिह्वल माँ की करूँणा समझ पा रहे हैं और शनै शैने अपने कर्म पथ पर वापसी के लिए अपने क़दमों को गति देने को तत्...

कौन
घिस घिस कसेगा
कसौटियों में 
और फिर
तरासेगा
भारत की मूरत वही ! 
खंडित
मुकुट है
घायल है गौरव
गिद्धों ने खाई
सोने की चिड़िया
समझ कर दही !
भोगी नहीं है
मुह की
आजादी
कानों सुनी है
देह दिखती उतारी
अंग्रेजों की वर्दी, 
काढ़ा करू
वैद्य लगते हैं
जाहिल
अंग्रेजी गोली
बिन हटती नहीं है
नकुओं की शर्दी,
रेढ़ों की
देवदारु
पचगुरिया
की बौलें
नीमों की झौंडी
गिलोय न रही !
कौन
घिस घिस कसेगा
कसौटियों में 
और फिर
तरासेगा
भारत की मूरत वही ! 
खंडित
मुकुट है
घायल है गौरव
गिद्धों ने खाई
सोने की चिड़िया
समझ कर दही !
देशी चिरैया
अंग्रेजी बोली
छलती हैं
छद्मी मुस्काने
चारा जुटाती
चुनगुन को तौलें, 
खा खा कर
अपने ही
खेतों की
उमदा फसलें
उपजाऊ धरती को
बंजर बनाने की कौलें, 
वैतरणी बोली
चौकड़ियाँ
भरती
आँगन
की बछिया
नरदों में प्यासी बही !
कौन
घिस घिस कसेगा
कसौटियों में 
और फिर
तरासेगा
भारत की मूरत वही ! 
खंडित
मुकुट है
घायल है गौरव
गिद्धों ने खाई
सोने की चिड़िया
समझ कर दही !
तिरंगा फहराता
कुकुर बिलियाँ राजा
किले पर
पगड़ी को भूला
बिसरा है
ओंठों की बोली, 
राधा की आबरू
रौंद रहीं
सिओलानें 
हिजड़ों के आगे
खोल रहीं
छतियों की चोली,
मोहन की
मुरली
बजाये बंदरिया
पाँव
पगहा में बांधे
नचाये मन की कही !
कौन
घिस घिस कसेगा
कसौटियों में 
और फिर
तरासेगा
भारत की मूरत वही ! 
खंडित
मुकुट है
घायल है गौरव
गिद्धों ने खाई
सोने की चिड़िया
समझ कर दही !

भोलानाथ
डॉराधा कृष्णन स्कूल के बगल में
अन अच्.-७ कटनी रोड मैहर
जिला सतना मध्य प्रदेश .भारत
संपर्क – 8989139763

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