Saturday, 4 May 2013

हिंदी साहित्य के केंद्र में [भोलानाथ के नवगीत]

मेरे अपने सभी सुधि पाठक ,सुधि श्रोता और नवोदित, वरिष्ठ,तथा मेरे समय साथ के सभी गीतकार,नवगीतकार और साहित्यिक मित्रों को समर्पित आज का यह नया नवगीत विद्रूप यथार्थ की धरातल पर सामाजिक व्यवस्था और प्रबंधन की चरमराती लचर तानाशाही के कुरूप चहरे की मुक्म्मल बदलाव की जरूत महसूस करता हुआ नवगीत !
साहित्यिक संध्या की सुन्दरतम नवरात्रि की पूर्व बेला में निवेदित कर रहा हूँ !आपकी प्रतिक्रियाएं ही इस चर्चा और पहल को सार्थक दिशाओं का सहित्यिक बिम्ब दिखाने में सक्षम होंगी !

और आवाहन करता हूँ "हिंदी साहित्य के केंद्रमें नवगीत" के सवर्धन और सशक्तिकरण के विविध आयामों से जुड़ने और सहभागिता निर्वहन हेतु !आपने लेख /और नवगीत पढ़ा मुझे बहुत खुश हो रही है मेरे युवा मित्रों की सुन्दर सोच /भाव बोध /और दृष्टि मेरे भारत माँ की आँचल की ठंडी ठंडी छाँव और सोंधी सोंधी मिटटी की खुशबु अपने गुमराह होते पुत्रों को सचेत करती हुई माँ भारती ममता का स्नेह व दुलार निछावर करने हेतु भाव बिह्वल माँ की करूँणा समझ पा रहे हैं और शनै शैने अपने कर्म पथ पर वापसी के लिए अपने क़दमों को गति देने को तत्...

अंगारों पर
खून पसीना
मेहनत सूद
उजाड़ जिंदगी
सुने न अमुआं
छाँह गिलहरी !
कन्धों गिरगिट
अस्तीनों के
विषधर
अमरबेल
सेनापति सींचें
तुलसी खड़ी कचहरी !
हाँथ कंगाली
पिसवन पानी
चढ़ी
त्योरियां
सूखी ओठें
दबी बीड़ियाँ,
ढली देह
खांसी का सागर
नीम नसीहत
कान न भाये
मधु मक्खी
मरी सीढियां,
खूंटे घाँस
अकारथ
हो गई
लहटी गईया
गोलैंदा खाये
महुआ पाँल्हर ठहरी !
अंगारों पर
खून पसीना
मेहनत सूद
उजाड़ जिंदगी
सुने न अमुआं
छाँह गिलहरी !
कन्धों गिरगिट
अस्तीनों के
विषधर
अमरबेल
सेनापति सींचें
तुलसी खड़ी कचहरी !
बिगड़ी बीन
बजाये कैसे
पहचाने न
सांप
संपेरिन
भरे पिंटारा साजिस,
छोड़ हवा
सूरज सोया
जली झोपडी
राख है ठंडी
बंसवट
बांटे माचिस,
पंजों में
आकाश थाँमकर
अलख जगाती
उलटी लेटी
पिपर टहनियां
रात टिटहरी !
अंगारों पर
खून पसीना
मेहनत सूद
उजाड़ जिंदगी
सुने न अमुआं
छाँह गिलहरी !
कन्धों गिरगिट
अस्तीनों के
विषधर
अमरबेल
सेनापति सींचें
तुलसी खड़ी कचहरी !
मौन ओंठ
क्या बोलेंगे
खोलेंगे
क्या गूंगे
राज
शकुनिया पाशों के,
दुर्दशा देख
भयभीत
बहुत हैं
बाग़ बगीचे
बिछे हैं
टेशु झरे पलाशों के,
चूँगी चिलम
रमी
शिव पिंडी
प्यासे नंदी
मेघ निहारें
पतरोई में पुरी जलहरी !
अंगारों पर
खून पसीना
मेहनत सूद
उजाड़ जिंदगी
सुने न अमुआं
छाँह गिलहरी !
कन्धों गिरगिट
अस्तीनों के
विषधर
अमरबेल
सेनापति सींचें
तुलसी खड़ी कचहरी !

भोलानाथ
डॉराधा कृष्णन स्कूल के बगल में
अन अच्.-७ कटनी रोड मैहर
जिला सतना मध्य प्रदेश .भारत
संपर्क – 8989139763

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