Wednesday, 15 May 2013

भोलानाथ के नवगीत [बडबोलिये]

मेरे अपने सभी सुधि पाठक ,सुधि श्रोता और नवोदित, वरिष्ठ,तथा मेरे समय साथ के सभी गीतकार,नवगीतकार और साहित्यिक मित्रों को समर्पित आज का यह नया नवगीत विद्रूप यथार्थ की धरातल पर सामाजिक व्यवस्था और प्रबंधन की चरमराती लचर तानाशाही के कुरूप चहरे की मुक्म्मल बदलाव की जरूत महसूस करता हुआ नवगीत !
साहित्यिक संध्या की सुन्दरतम बेला में निवेदित कर रहा हूँ !आपकी प्रतिक्रियाएं ही इस चर्चा और पहल को सार्थक दिशाओं का सहित्यिक बिम्ब दिखाने में सक्षम होंगी !

और आवाहन करता हूँ "हिंदी साहित्य के केंद्रमें नवगीत" के सवर्धन और सशक्ती करण के विविध आयामों से जुड़ने और सहभागिता निर्वहन हेतु !आपने लेख /और नवगीत पढ़ा मुझे बहुत खुशी हो रही है मेरे युवा मित्रों की सुन्दर सोच /भाव बोध /और दृष्टि मेरे भारत माँ की आँचल की ठंडी ठंडी छाँव और सोंधी सोंधी मिटटी की खुशबु अपने गुमराह होते पुत्रों को सचेत करती हुई माँ भारती ममता का स्नेह व दुलार निछावर करने हेतु भाव बिह्वल माँ की करूँणा समझ पा रहे हैं और शनै शैने अपने कर्म पथ पर वापसी के लिए अपने क़दमों को गति देने को तत्पर हैं ...

बडबोलिये
अंधों को
गूंगों ने
सौंपे हैं
राज मुकुट
बहरों को दे दीं तलवारें !
कसाइयों के
बूचड में
जलसा सजे हैं
बकरा बली के
राँपियों की
आरती उतारें !
घर की दहलीजों की
अंतहीन शरहद न जाने
भेड़ियों का
आँगन में
करते हैं स्वागत
कंधे उचका कर,
ह्वेनसांग
लिखने को
आतुर हैं फिर से
सीमाओं के शिलालेख
लद्दाखी घाटियों में
आँखें दिखाकर,
शरहद के
सूरवीर
शेरों की खातिर
भेजी हैं
राजा ने
पन्नी में चूड़ी सलवारें !
बडबोलिये
अंधों को
गूंगों ने
सौंपे हैं
राज मुकुट
बहरों को दे दीं तलवारें !
कसाइयों के
बूचड में
जलसा सजे हैं
बकरा बली के
राँपियों की
आरती उतारें !
मुर्गों के
पखनों में
बाँध बाँध छुरियाँ
लड़ायेंगे जगह जगह
भीड़ मजमा लगायेंगे
पिट्ठू दरवारी,
चन्दन और तुलसी के
चौरों को
अपने ही
हाथों से लीपेंगे
गंधाते खच्चर के
गोबर से बारी बारी,
उतनेगे खोंपा
खपरैले
फ़ोड़ेंगे
माटी के चूल्हे
तोड़ेंगे
ठाठ और म्यारें !
बडबोलिये
अंधों को
गूंगों ने
सौंपे हैं
राज मुकुट
बहरों को दे दीं तलवारें !
कसाइयों के
बूचड में
जलसा सजे हैं
बकरा बली के
राँपियों की
आरती उतारें !
नाचेंगे छाती में
पीपर देवारी
मूँडों में
बाँध बाँध
मोर पंख और
मबरी की फूली डरईया,
मादर की
थापों में
झंमका के छाहुर
बांहों दुबका के
दुधपीमा बछिया
बिचकायेंगे खेरका की गईया,
शाह नहीं
मस्जिद के
शाही इमामों की
बांछें
लेकर तलवारें
कलम को ललकारें !
बडबोलिये
अंधों को
गूंगों ने
सौंपे हैं
राज मुकुट
बहरों को दे दीं तलवारें !
कसाइयों के
बूचड में
जलसा सजे हैं
बकरा बली के
राँपियों की
आरती उतारें !

भोलानाथ
डॉराधा कृष्णन स्कूल के बगल में
अन अच्.-७ कटनी रोड मैहर
जिला सतना मध्य प्रदेश .भारत
संपर्क – 8989139763

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