Thursday, 23 May 2013

भोलानाथ के नवगीत [कभी कोई पूछे तो हम जीते हैं कैसे]

मेरे अपने सभी सुधि पाठक ,सुधि श्रोता और नवोदित, वरिष्ठ,तथा मेरे समय साथ के सभी गीतकार,नवगीतकार और साहित्यिक मित्रों को समर्पित आज का यह श्रंगारिक विरह नवगीत
साहित्यिक संध्या की सुन्दरतम बेला में निवेदित कर रहा हूँ !आपकी प्रतिक्रियाएं ही इस चर्चा और पहल को सार्थक दिशाओं का सहित्यिक बिम्ब दिखाने में सक्षम होंगी !

और आवाहन करता हूँ "हिंदी साहित्य के केंद्रमें नवगीत" के सवर्धन और सशक्तिकरण के विविध आयामों से जुड़ने और सहभागिता निर्वहन हेतु !आपने लेख /और नवगीत पढ़ा मुझे बहुत खुश हो रही है मेरे युवा मित्रों की सुन्दर सोच /भाव बोध /और दृष्टि मेरे भारत माँ की आँचल की ठंडी ठंडी छाँव और सोंधी सोंधी मिटटी की खुशबु अपने गुमराह होते पुत्रों को सचेत करती हुई माँ भारती ममता का स्नेह व दुलार निछावर करने हेतु भाव बिह्वल माँ की करूँणा समझ पा रहे हैं और शनै शैने अपने कर्म पथ पर वापसी के लिए अपने क़दमों को गति देने को तत्...

कभी कोई पूछे तो हम जीते हैं कैसे
शब्दों के बीच में रहते हैं कैसे !
ये नगमा ये बातें लगती हैं
हमको अब सपनों के जैसे !
जिन्दगी को जिन्दगी बनायें हम कैसे !
आपने तो सुन कर
बहलाया है खुद को
ये गीत ग़ज़ल औरे नगमे,
हमें भी बताओ
कैसे जियें हम
किसके सहारेशब्दों के जग में,
इस तरह मुस्करा कर
याद हमको दिलाया करो ना तुम ऐसे !
जिन्दगी को जिन्दगी बनायें हम कैसे !
कभी कोई पूछे तो हम जीते हैं कैसे
शब्दों के बीच में रहते हैं कैसे !
ये नगमा ये बातें लगती हैं
हमको अब सपनों के जैसे !
जिन्दगी को जिन्दगी बनायें हम कैसे !
बैठें हैं अभी अभी
अनचीन्हे चेहरों की
तस्वीरें को लेकर,
रात आधी होने को है
सो जायें कैसे और किसे
शुभ रात्रि कह कर,
हमदिल जले हैं
मरहम लगाया करो ना तुम ऐसे !
जिन्दगी को जिन्दगी बनायें हम कैसे !
कभी कोई पूछे तो हम जीते हैं कैसे
शब्दों के बीच में रहते हैं कैसे !
ये नगमा ये बातें लगती हैं
हमको अब सपनों के जैसे !
जिन्दगी को जिन्दगी बनायें हम कैसे !
टूटे हैं हम
खिलौनों के जैसे
चाहत हमारी मिली ना हमें,
अपनी जुबानी
दर्दे दिल की कहानी
रो रो के कैसे सुनाएँ तुम्हें,
दुखती रग पर फेरो न ऊँगली
समझो व्यथा तुम रुलाओ ना ऐसे !
जिन्दगी को जिन्दगी बनायें हम कैसे !
कभी कोई पूछे तो हम जीते हैं कैसे
शब्दों के बीच में रहते हैं कैसे !
ये नगमा ये बातें लगती हैं
हमको अब सपनों के जैसे !
जिन्दगी को जिन्दगी बनायें हम कैसे !

भोलानाथ
डॉ,राधा कृष्णन स्कूल के बगल में
अन.अच्. -७ कटनी रोड मैहर ,
जिला सतना मध्य प्रदेश .भारत
संपर्क -8989139763

No comments:

चलते चलते अजाने सफर में

चलते चलते अजाने सफर के हारे थके लड़खड़ाने लगे हैं समतल सतह के खुरदरिया पांव! मंजिल का कोई ठिकाना पता न झुकी रीढ़ के बोझ पर बोझ धरती रही ...