Friday, 17 May 2013

भोलानाथ के नवगीत [भेदों मतभेदों]

मेरे अपने सभी सुधि पाठक ,सुधि श्रोता और नवोदित, वरिष्ठ,तथा मेरे समय साथ के सभी गीतकार,नवगीतकार और साहित्यिक मित्रों को समर्पित आज का यह नया नवगीत विद्रूप यथार्थ की धरातल पर सामाजिक व्यवस्था और प्रबंधन की चरमराती लचर तानाशाही के कुरूप चहरे की मुक्म्मल बदलाव की जरूत महसूस करता हुआ नवगीत !
साहित्यिक संध्या की सुन्दरतम बेला में निवेदित कर रहा हूँ !आपकी प्रतिक्रियाएं ही इस चर्चा और पहल को सार्थक दिशाओं का सहित्यिक बिम्ब दिखाने में सक्षम होंगी !

और आवाहन करता हूँ "हिंदी साहित्य के केंद्रमें नवगीत" के सवर्धन और सशक्ती करण के विविध आयामों से जुड़ने और सहभागिता निर्वहन हेतु !आपने लेख /और नवगीत पढ़ा मुझे बहुत खुशी हो रही है मेरे युवा मित्रों की सुन्दर सोच /भाव बोध /और दृष्टि मेरे भारत माँ की आँचल की ठंडी ठंडी छाँव और सोंधी सोंधी मिटटी की खुशबु अपने गुमराह होते पुत्रों को सचेत करती हुई माँ भारती ममता का स्नेह व दुलार निछावर करने हेतु भाव बिह्वल माँ की करूँणा समझ पा रहे हैं और शनै शैने अपने कर्म पथ पर वापसी के लिए अपने क़दमों को गति देने को तत्पर हैं ...

भेदों मतभेदों
तर्कों वितरकों
का जहर
कोई काम
नहीं आएगा
बिल्लियों और
चूहों की पूंछें
देख रहा
खोखल में बैठा उलूक !
पढ़े लिखे
प्रतिकारी दिशाहीन
भटक रहे
वाजिव आक्रोश की
चेहरों में
अंकित है पीड़ा
काँटों
कशालों में
सूखा है ओंठों का थूक !
हजारे आन्दोलन
और सत्य के पुजारी
अहिंसा पुरोधा
मनीषी बाबाओं के
शतरंगी पंख
छांट देते हैं
परभक्षी शातिर,
गुल्ले गुलेलों की
मारी गौरैया
आँखों में देखे
सहलाते झुर्रियां
नामर्द मूछें मुडाते
शूती भर
दारु की खातिर,
चौपाली
दलालों ने
फैलाई
वंशवादी अमरबेल
सूखी है मिर्ची
भाँटे की खेती
तेजाबी पानी में
मरती मछलियाँ
नदियाँ हैं मूक !
भेदों मतभेदों
तर्कों वितरकों
का जहर
कोई काम
नहीं आएगा
बिल्लियों और
चूहों की पूंछें
देख रहा
खोखल में बैठा उलूक !
पढ़े लिखे
प्रतिकारी दिशाहीन
भटक रहे
वाजिव आक्रोश की
चेहरों में
अंकित है पीड़ा
काँटों
कशालों में
सूखा है ओंठों का थूक !
अच्छी है
पत्थर पहाड़ों में
बर्फीली रंगत
घाँस नहीं उगती
न हरियाली सूखती
धूप छाँव संवेदन
स्पर्श नहीं करती,
टकरा कर
लौट आती हैं
बड़ी बड़ी आंधियां
अपने अनुभव
अनुभूतियों के
अर्जित संबोधन
ओंठों के द्वार नहीं धरतीं,
तृप्ती त्योहारों का
सागर
मृग छलना के पीछे
मरुथल में भागा
दुविधा में
झेल रही
कैक्टस की छाँव
रेतीले टीलों की
आगी सी लूक !
भेदों मतभेदों
तर्कों वितरकों
का जहर
कोई काम
नहीं आएगा
बिल्लियों और
चूहों की पूंछें
देख रहा
खोखल में बैठा उलूक !
पढ़े लिखे
प्रतिकारी दिशाहीन
भटक रहे
वाजिव आक्रोश की
चेहरों में
अंकित है पीड़ा
काँटों
कशालों में
सूखा है ओंठों का थूक !
धीरे धीरे
उठती हवाओं के
बनते बवंडर
रोकेंगे कैसे
गाँव शहर महा नगरों के
गणवेशी
वर्दी के बड़े बड़े गुंडे,
सेतु देख
छोड़ेंगे
लंका विभीषण
बांधेगे छोरेंगे
खोलेंगे राज सभी
तोड़ेंगे बुर्ज
ले ले के हांथों में डंडे,
काटी भुजाएं
लिखेंगी
पहचानी मजमूनें
शहीदों की
सूची में
टूटी गदाओं की
मुठिया में होगी
अंकित इतिहासों की
छोटी सी चूक !
भेदों मतभेदों
तर्कों वितरकों
का जहर
कोई काम
नहीं आएगा
बिल्लियों और
चूहों की पूंछें
देख रहा
खोखल में बैठा उलूक !
पढ़े लिखे
प्रतिकारी दिशाहीन
भटक रहे
वाजिव आक्रोश की
चेहरों में
अंकित है पीड़ा
काँटों
कशालों में
सूखा है ओंठों का थूक !

भोलानाथ
डॉराधा कृष्णन स्कूल के बगल में
अन अच्.-७ कटनी रोड मैहर
जिला सतना मध्य प्रदेश .भारत
संपर्क – 8989139763

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