Wednesday, 29 May 2013

भोलानाथ के नवगीत [खेल खेल में]

मेरे अपने सभी सुधि पाठक ,सुधि श्रोता और नवोदित, वरिष्ठ,तथा मेरे समय साथ के सभी गीतकार,नवगीतकार और साहित्यिक मित्रों को समर्पित आज का यह श्रंगारिक नवगीत
साहित्यिक संध्या की सुन्दरतम बेला में निवेदित कर रहा हूँ !आपकी प्रतिक्रियाएं ही इस चर्चा और पहल को सार्थक दिशाओं का सहित्यिक बिम्ब दिखाने में सक्षम होंगी !

और आवाहन करता हूँ "हिंदी साहित्य के केंद्रमें नवगीत" के सवर्धन और सशक्तिकरण के विविध आयामों से जुड़ने और सहभागिता निर्वहन हेतु !आपने लेख /और नवगीत पढ़ा मुझे बहुत खुश हो रही है मेरे युवा मित्रों की सुन्दर सोच /भाव बोध /और दृष्टि मेरे भारत माँ की आँचल की ठंडी ठंडी छाँव और सोंधी सोंधी मिटटी की खुशबु अपने गुमराह होते पुत्रों को सचेत करती हुई माँ भारती ममता का स्नेह व दुलार निछावर करने हेतु भाव बिह्वल माँ की करूँणा समझ पा रहे हैं और शनै शैने अपने कर्म पथ पर वापसी के लिए अपने क़दमों को गति देने को तत्...खेल खेल जज्बातों से

खेल खेल
जज्बातों से
दिल
गिरगिट सा
रंग
बदलता है !
जैसे
मेले में
बच्चा
पाने को
हर चीज
मचलता है !
रंग बिरंगी
इस
दुनियां में
कौन से
रंग हैं अपने,
जाने कैसे
पहचानें
कैसे
हवा में
उड़ते सपने,
जब तक
सीने में
दिल है
देंह में
खूब
धडकता है !
कैसा
बंधन
कैसा रिश्ता
कैसा दिल से
दिल का नाता है,
समझ सका
न नब्ज
टटोली
न कोई किसी को
समझाता है,
देख देख कर
पढ पढ
चहरे
रट रट पन्ने
बहुत
पलटता है !
मनमाफिक
सीढी पर है
चाँद
आज का
आधा खिला हुआ,
सोई साँझ
रात की
गाथा
सपनों भरा
पराग चुआ,
कानाफूसी
हुआ
सबेरा
धूप में
दर्द
पिघलता है !

भोलानाथ
डॉ,राधा कृष्णन स्कूल के बगल में
अन.अच्. -७ कटनी रोड मैहर ,
जिला सतना मध्य प्रदेश .भारत
संपर्क -08989139763

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