Saturday, 25 May 2013

भोलानाथ के नवगीत [दूध धुली पगड़ी के पैंतरों से]

मेरे अपने सभी सुधि पाठक ,सुधि श्रोता और नवोदित, वरिष्ठ,तथा मेरे समय साथ के सभी गीतकार,नवगीतकार और साहित्यिक मित्रों को समर्पित आज का यह नया नवगीत विद्रूप यथार्थ की धरातल पर सामाजिक व्यवस्था और प्रबंधन की चरमराती लचर तानाशाही के कुरूप चहरे की मुक्म्मल बदलाव की जरूत महसूस करता हुआ नवगीत !
साहित्यिक संध्या की सुन्दरतम बेला में निवेदित कर रहा हूँ !आपकी प्रतिक्रियाएं ही इस चर्चा और पहल को सार्थक दिशाओं का सहित्यिक बिम्ब दिखाने में सक्षम होंगी !

और आवाहन करता हूँ "हिंदी साहित्य के केंद्रमें नवगीत" के सवर्धन और सशक्ती करण के विविध आयामों से जुड़ने और सहभागिता निर्वहन हेतु !आपने लेख /और नवगीत पढ़ा मुझे बहुत खुशी हो रही है मेरे युवा मित्रों की सुन्दर सोच /भाव बोध /और दृष्टि मेरे भारत माँ की आँचल की ठंडी ठंडी छाँव और सोंधी सोंधी मिटटी की खुशबु अपने गुमराह होते पुत्रों को सचेत करती हुई माँ भारती ममता का स्नेह व दुलार निछावर करने हेतु भाव बिह्वल माँ की करूँणा समझ पा रहे हैं और शनै शैने अपने कर्म पथ पर वापसी के लिए अपने क़दमों को गति देने को तत्पर हैं .

दूध धूली
पगड़ी के
पैंतरों से
बंधी रहीं
दीमक की
बड़ी बड़ी बामियाँ !
करती रहीं
खोखल
ताजो तख़्त
पलती रहीं
शाही
आस्तीनों में खामियाँ !
चाटुकार
चोरों ने
असली डकैतों को
पहना कर राजमुकुट
दे दी शिव संज्ञा,
भजन मुखी
ओंठों का
रक्त नहीं छूटा
बूचड परनाले सी
गंधाती गंगा,
कोल्हू
कोनैतों में
भैस बंधी
कांडी
कोदई सी
कूट रहीं सामियाँ !
दूध धूली
पगड़ी के
पैंतरों से
बंधी रहीं
दीमक की
बड़ी बड़ी बामियाँ !
करती रहीं
खोखल
ताजो तख़्त
पलती रहीं
शाही
आस्तीनों में खामियाँ !
ग्रहण लगा सूरज
क्षितिज छोड़
चाह रहा
नालों परनालों में
डूबकर नहाना,
खंती की
छोटी मछलियाँ
क्या जाने
बगुलों की आँखों का
शातिर निशाना,
प्राणभेदी
किरणों की
होती हैं
गुपचुप
भेडियों के
बीच में नीलामियाँ !
दूध धूली
पगड़ी के
पैंतरों से
बंधी रहीं
दीमक की
बड़ी बड़ी बामियाँ !
करती रहीं
खोखल
ताजो तख़्त
पलती रहीं
शाही
आस्तीनों में खामियाँ !
कोयले की खानों में
कितने
दधीचों ने
जनहित की खातिर
प्राण तजे अपने,
छूटा है
कोरों का काजल
आँखों में
आये नहीं
अभी तक शतरंगी सपने,
लिपी पुती
ऊपरी
अटारी से
गिरगिट सी
झाँक रहीं
लाल पीली नाकामियाँ !
दूध धूली
पगड़ी के
पैंतरों से
बंधी रहीं
दीमक की
बड़ी बड़ी बामियाँ !
करती रहीं
खोखल
ताजो तख़्त
पलती रहीं
शाही
आस्तीनों में खामियाँ !

भोलानाथ
डॉराधा कृष्णन स्कूल के बगल में
अन अच्.-७ कटनी रोड मैहर
जिला सतना मध्य प्रदेश .भारत
संपर्क – 8989139763

No comments:

चलते चलते अजाने सफर में

चलते चलते अजाने सफर के हारे थके लड़खड़ाने लगे हैं समतल सतह के खुरदरिया पांव! मंजिल का कोई ठिकाना पता न झुकी रीढ़ के बोझ पर बोझ धरती रही ...