सीधी सड़क अजीब मुखौटा
चलता उलटे पांव !ताल ठोक न भाग यहां से
यह मुर्दों का गांव !
हिले डुले न देह बे पानी
पुतरी नचती आंख
नब्ज दिल
धक धक धड़के
बाण बिंधे से प्राण कल्हारे,
थके हाथ डुगडुगी बजाते
करवट कलथी
चेत दिखे न
टिटरी मार कुहनियां
मुड़ी मुड़ी न पांव पसारे,
लाघव लोच अबोध राग के
औंधे परे निधांव !
मुन्नाहट बगदरी कान की
झरे न झारे आयत आन
जहन के भीतर
अधपक
खिचड़ी दगे न चूल्हे आग,
पुलिया पांव पहुँच के बाहर
धूमिल धूमिल धुंध ढोंग कुछ
पढ़ा न जाये
लिखा
लिलारे कोल्हू पेरा भाग,
आग बरसता सिर का सूरज
पावों लिपटी छांव !
बांधव बंधुल पीठ के भाई
बंधे बांह से
गुपचुप
जहर उगलते
बखिया फारें घुसे घुसे अस्तीन,
जय विजय पराजय ओढ़ मरे न
हिंसक रहे जनम भर
जबराजोर
अडी में
फटी वक्ष की दरियादिली जमीन,
कांईठ करु हरु किल्लत में
कांखे गांव गिरांव !
भोलानाथ
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