Wednesday, 22 May 2024

तम्बू तारन तान तमूरा

तम्बू तारन तान तमूरा सारंगी पर झूम 

कूद कचर न झोपड़ झुग्गी
ऊंची ऊंची मलखमियों की
उंच अटारी ऊंचे झंडे नहीं जेब जागीर !

फ़ैल पसर न चौका चौरे लात लथेड़ी मुड़भेली में आसमान नहीं बंटने वाला
पत्थर मार लबेदी
ललकारो से क्षितिज सितारे तोड़ सके न वीर !

दूर की कौड़ी का सुख स्वांग भुनाने वाले
अलख फकीरी के
किरदार मुखौटों चुपरी
झरे अबीरन किरचा किरचा लीपा पोती,

निश्छल हृदय जहर पी पेट मरोड़ की पीर
पचा पहिचाने बिच्छु ब्याल डटइयाँ
बाड़े भीतर
घूम रहे जो गिरगिट लील के  मोती,

बंदरमुखी मुख लोक लुभावन ओंठ की चुपड़ी बात बलैयों
बतकही हवा की गाल गिलौरी
पान चबाती
दिशाधुन्ध में फैली पसरी पाखंडी तासीर !

छू मंतर सा समय हाथ का बे प्रज्ञप्ति
उड़ गया न लौटे खोंपा मोगरी छोड़
बसेरा
बुनते बुनते डार डार की मरी चिरैयां,

ऋतुओं ऋतुओं धूल नहाती पता न पूंछा
बहते जल का
झंझावाती बसर की
हिलकी गाते गाते आँखों भरीं तरैयां,

घाट घाट की दानाडारी पुण्यकमाई
हांथ उंगलियां बांध बांध के
मुट्ठी घुमके हुमक हुमक के
हने पेट में धंसा करेजा आश्वासन का तीर !

नीर नयन भर शेष सम्पदा मुख मोहर
गिरवी धर मोल बिसाही
गुमनाम गुलामी
हुकुम की ड्योढ़ी हिलता मूंड उठी न आंखें,

हां में हां की मौनमुखी फरियादी सूची
पढ़े सुने न देखे सुस्त व्यवस्था
पिचका पेट
घिनौची प्यास घैल सी कलथी बांखें,

सुबह शाम सैलाब सड़क का जन सम्बोधन
स्वयं प्रभा की अजमाईस के अगुआ
लांघ लकीरें फिरें पकाते
ख्वाब की खिचड़ी हंडियों हंडियों खीर !

भोलानाथ 

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