Wednesday, 22 May 2024

व्यूह परिधि के हाहाकारी

व्यूह  परिधि  के हाहाकारी 

साक्ष्य के  अक्स 
आँख  किस  आँख  को  दे  दे  |

जुमलेबाज शिविर का 
है  क्या  कोई  धनुर्धर 
चील  चीख  सुन  लक्ष्य  जो  भेदे |

किरदार  द्रोण  के  बने  रहे  वे 
थके  न  हारे
पिछलग्गू  जन 
झुक  झुक शीश  नवाते ,

कुओं  के  बाहर  क्षितिज  देख
ऊँचे 
सिर वाले 
ऊँचे  रहे  सदा  टखने  मिजवाते,

भेंट  मिली दुदकार फतोहीं 
देह  ढके  या 
ऊब  उबासी  कन्धों  रे  दे |


उखड़ी नाभि  की  करकस  पीड़ा 
नस  नस  चिलके
ऐंठे  पेट 
न  छूटे  हाथ  का  लोटा,

मींज मसल  पिड़री की  मालिश
वैद्य हकीमी
विफल 
बिराये  खूंटी  टंगा लंगोटा,

गोबर  गुदड़ी 
पुआल  पला सच 
बिलों  में  पलते चूहे सांप रगेदे |

पग  पग  पर्वत  जैसे 
अवरोध हटाते
झरा  पसीना 
समय सार जीवन का  बीता,

भूले  बिसरे  शिलान्यास पढ़ 
चरणबद्ध  पग 
काट  रहा  है 
लोकार्पण  का  फीता,

सूरजमुखी  बिहान  चांदनी 
रात तरैयां 
जुगनू  जैसे  क्षितिज  के  गेदे |

    भोलानाथ  

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