Thursday, 28 October 2021

ठुमका ठुमको

 ठुमका ठुमको 

बड़ी प्यारी है थिरकन तुम्हारी ! 


चेहरा नहीं भीड़ के 

निभती निहु हिस्सेदारी! 


ओढो बिछाओ 

बेहाली 

गुजारे को हाजिर हैं 

चिथरा चिथरियाँ,

खैरात खाये 

ओढाये उपन्नों के 

भीतर से 

झाकें थेगरियाँ, 


किचराई आखों से 

चुचुआ के झरती लाचारी ! 


गांठों के 

सिरे गिरे कहाँ 

तजबीज बोध 

दूर दृष्टि नही तेरी,

अजायब मठों के 

अजायब अघोरी 

अपने नहीं हैं 

न इनकी फेरी, 


रहने दो जय जयकारों के

स्वर दुनिया दारी ! 


गाये तजुर्बे 

कानों को फबे न 

तुम्हारे

मुनमुनाते बगदर सा झाडा,

जिया औघड़ आराध्य सा 

आंखों जहन के 

सपने 

मुखौटों के बाड़ा, 


अकारथ कटी उमर 

नाचते निभाते जिम्मेदारी ! 


भोलानाथ

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