नटनियों नटों
डंगचढ़ियों के करतबकूंचों के
गलियों में रहते
धमनियों शिराओं न बहते !
इष्ट मान
पीछे पीछे जो भागे
शरणागत हो बजाओ
देवालय की घंटियां
अल्ला अजान सांई कहते !
तुम्हारे आदर्शों के
बेधर्मी घोड़ों ने
खाया खेत
चरी गाढ़ी कमाई की
लहलहाती
फसलें तुम्हारी ,
नाचे
पाँव बांध घुंघरू
पड़ोसी के आंगन
बरदौरी विदेशी
जने गांव खच्चर
बेलगाम रही करियारी,
छोरो डांग नटनी रसरिया
भद्द से
भाड़ में गिरेंगे
सिरे आ पंडा के
बकुरेंगे दहिया सा दहते !
हल्दी नेउना लगा
कूट देते पहले नसी
फिर नशेड़ीऔलादें
कैसे परोसती
देश को
ड्रग्स की बियारी,
वंशावली पढ़
न्यालय न आती दलाली
लीप पोत बिल मुसकुर के
चूल्हा चढ़ाने
मिर्चा मसालों की
गबड़ी तरकारी,
चश्मे के पीछे आंखों के
आगे
पुड़िया के सच का
गढ़ते मंसूबा थकते नहीं
झूठ पर झूठ तहते !
खाकर के ठोकर
मुह के बल
गिरता जब जोकर
झाड़ पोंछ मुखड़ा
उठाने उमड़ता है
बुद्धिहीन पुतलों का रेला,
प्राणवान पाप धोने को
कैमरे के आगे
भाग
मीडिया के जागे
कवर हुआ ज्यों
शिप्रा उज्जैनी का मेला,
जाने न कोई समझे न कोई
बीतें दिन
चालबाज
भेड़ियों की खाल में
सियारों की खुराफ़ात सहते !
भोलानाथ
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