Monday, 11 October 2021

सुचिता सरलता

सुचिता सरलता 

बोलों कुबोलों से
जब तब
हमने सुना है कलम बोलती है !
हमने सुना है कलम बोलती है !

संदर्भित सुभीता
सुख सार
दुख छल मसौदों के
बड़े बड़े राज खोलती है !
हमने सुना है कलम बोलती है !

कई कई रातों के
ख्वाबों कुख्वाबों
मंगल
अमंगल के
गहरे रहस्यों में जाके,
लिपे पुते चेहरों की
परतों के पाप पुण्य
पीड़ा
अनबूझ हैसियत की
कैफियत गिना के,

उल्टी सीधी
युग्मी हवाओं के
रुप रंग 
सरेआम हाट बाट तोलती है !
हमने सुना है कलम बोलती है !

मुह देख बीड़ा
पोंद देख पीढ़ा
की कथनी नकार
निहित स्वार्थ की
गठान खोल खबर लिखे,
चिकनी चुपड़ी
लीकों के बाहर
अंधेरों के गांव में
हाथों की
जलती मशाल दिखे,

दूध की दोहनियों में
स्याट लय
घिनौचियों में
सुधा सार घोलती है !
हमने सुना है कलम बोलती है !

ताजो तख्त
सल्तनत की मिली भगत
माठा मथानी के
मलिन स्वांग सदा
हवा में उछाले,
व्यवस्था के
गंधाते आचरण को
वस्त्रों सा
फीच फीच
धार में समय के प्रच्छाले,

प्रतिरक्षा की
ख्वाहिशों में
नदियों की
धार धार नौका सी डोलती है !
हमने सुना है कलम बोलती है !

भोलानाथ

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