Sunday, 11 April 2021

याद नहीं करता कोई

 याद नहीं करता कोई 

किया धरा 

फिर जाने के बाद !

रहने तक ही साथ हैं

साक्ष्य सभी 

किये गये संवाद !

प्रेम की डोर में 

झोल रहे हों

या सिरे जिये हों 

खिंचे खिंचे 

कैसे भी गीत गये हों लिखे,

अमृत वर्षा कर 

देते हों 

जीवन 

रूखे सूखे नातों को 

चला चली की बेला नहीं दिखे,

भूल भुलैया में 

खो जाते 

हंसी खुशी अवसाद !

परत वक़्त की 

धीरे धीरे ढंक लेती है

मिट्टी कर देती है 

सब कुछ दीमक

विस्मृत गंध वयार,

औपचारिकता 

खूब निभाती है 

बंधी फ़ाइल सी 

झारी पोंछी 

जन्म मरण की तारिख त्योहार,

व्याख्यानों की 

पिटी तालियां

जायें जहन को फांद !

बांस बल्लियों 

गये लहराये

जैसे हवन सुगंध के साथ 

शिवालय में 

शिवरात्रि के भगवा झंडे,

कथा विसर्जित हुई कि 

मंत्र संत्र सब भूल गये 

बांच रहे 

गाथायें अपनी 

भष्मी तिलक लगाये पंडे,

जन्म जयंति श्रधांजलि 

पर्व परिहास

जस बाबा की पाद !

भोलानाथ

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