Monday, 9 August 2021

चल चला चल अकेला

 चल 

चला चल अकेला !

छोड़ 

खेमो का ये मेला ! 


कह न कुछ भी 

फेंक लेने दे इन्हें 

पांशे धुमा कर,

जय जतन 

ढूढ़ें अनाड़ी 

पादुकाओं में समाकर, 


देखता 

चल खेल खेला !

चल 

चला चल अकेला !

छोड़ 

खेमो का ये मेला ! 


पालने में 

पांव कैसे देखते

अंधे जो ठहरे,

और कठुला के सरीखा 

कंठ बांधे 

गाय सा डहरे, 


खेत 

खाया खूब केला !

चल 

चला चल अकेला !

छोड़ 

खेमो का ये मेला ! 


बाग की 

महती हिफाजत 

बंदर बांट होने लग गई,

फिर भला 

कौन रोकेगा इन्हें 

लाठियां ले कर नई, 


जप 

रहा है जाप चेला !

चल 

चला चल अकेला !

छोड़ 

खेमो का ये मेला ! 


भोलानाथ

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