Sunday, 29 August 2021

हालातों पर आज की तू भी

हालातों पर आज की 

तू भी 

चिंतन कर के देख ! 


विश्व व्यवस्था टूटी 

जैसे

दर दीमक खाई मेख ! 


नाच रही नभ उड़न लोमड़ी 

समझ सकी न

लदा पीठाहीं सीका पोंगा 

फेंक भगा 

क्यों बड़ा शिकारी

आंख दिखे न रेशम जाल,

बेमालिक असला घर 

हथिया कर

बम बारूदी ढेर के ढेर  

जखीरे उड़न खटोलों के 

दम पर लगी 

पकाने अपने मन की दाल, 


पाँव धरे न जब तक 

धरती

तब तक चिल्ली शेख ! 


उनके 

अपने आंत दांत हैं 

हाथ कटोरा मुह पगरैती 

आन बान सीना ताने 

गले में पट्टा 

हिंसक चावी टेंट बंधी है,

इस बरगद उस पीपर 

बैठक 

अपने अपने हित स्वारथ में 

रही विफल वार्ता

हारिल और टिटिहरी की 

वाजिब चिंता चोंच सधी है, 


शरहद का किरदार 

निभाये

कब तक परी धूर पर रेख ! 


ठेका ठास का पुख्ता 

अनुबंध ले डूबा 

जैसे पाही खेत बिजूका 

भय न मानें 

ठांय ठांय सुन 

भागें सुध बुध भूल भलाई,

चील गिद्ध के पहरों में 

कब तक और जियेगी 

घायल मैना 

बारूदी विस्फोटों में 

चिथड़े चिथड़े 

चिड़ियों जैसे उड़े ढलाई, 


सांसत में है दुनियां

तू भी

अपनी नब्ज सरेख ! 


भोलानाथ

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