मेरे अपने सभी मित्रों की शुभ कामनायें चाहूँगा मेरी बिटिया का आज जन्म दिन है और आज हम साथ नहीं हैं !बस उपहार स्वरुप एक नवगीत निवेदित कर रहा हूँ ! आशीर्वाद चाहूँगा !
अकेले गुनगुनाऊं
कौन गीत गाऊं
मम्मी की लोरी
पापा की थपकी
बिटिया न झपकी !
जनम दिन आया
सुबह ने बताया
फिर से
दुआओं का कुमकुम
कैसे लगाऊं मैं अबकी !
दूरी बहुत है
आँखों की पुतरी
परदेशी बिटिया
अभी अभी
पांवों में अपने
खड़ी होने की खातिर
तुलसी के चौरे
रपक कर झुकी है,
मकड़ियों के
जालों से
उलझा एकाकी
पीछे छूटी यादें
ख्यालों में अब भी
अक्षत के टीके
फुलहरी में साँसें
गंध सी रुकी है,
कलेजे के टुकरे
पतझर सा बिखरे
कैसे सहेजूँ
फरका की आंधी
गुजर गई कबकी !
अकेले गुनगुनाऊं
कौन गीत गाऊं
मम्मी की लोरी
पापा थपकी
बिटिया न झपकी !
जनम दिन आया
सुबह ने बताया
फिर से
दुआओं का कुमकुम
कैसे लगाऊं मैं अबकी !
कौन गीत गाऊं
मम्मी की लोरी
पापा की थपकी
बिटिया न झपकी !
जनम दिन आया
सुबह ने बताया
फिर से
दुआओं का कुमकुम
कैसे लगाऊं मैं अबकी !
दूरी बहुत है
आँखों की पुतरी
परदेशी बिटिया
अभी अभी
पांवों में अपने
खड़ी होने की खातिर
तुलसी के चौरे
रपक कर झुकी है,
मकड़ियों के
जालों से
उलझा एकाकी
पीछे छूटी यादें
ख्यालों में अब भी
अक्षत के टीके
फुलहरी में साँसें
गंध सी रुकी है,
कलेजे के टुकरे
पतझर सा बिखरे
कैसे सहेजूँ
फरका की आंधी
गुजर गई कबकी !
अकेले गुनगुनाऊं
कौन गीत गाऊं
मम्मी की लोरी
पापा थपकी
बिटिया न झपकी !
जनम दिन आया
सुबह ने बताया
फिर से
दुआओं का कुमकुम
कैसे लगाऊं मैं अबकी !
भोलानाथ
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