मेरे
अपने सभी सुधि पाठक ,सुधि श्रोता और नवोदित, वरिष्ठ,तथा मेरे समय साथ के
सभी गीतकार,नवगीतकार और साहित्यिक मित्रों को समर्पित आज का यह नवगीत
फागुनी उमंगों का गीत तो नहीं है फिर भी आशा करता हूँ ! आपको भी तरंगायित
करने में सफल होगा !
साहित्यिक अर्ध रात्रि की सुन्दरतम शीतल बासंती
बेला में निवेदित कर रहा हूँ !आपकी प्रतिक्रियाएं ही इस चर्चा और पहल को
सार्थक दिशाओं का सहित्यिक बिम्ब दिखाने में सक्षम होंगी !
और
आवाहन करता हूँ "हिंदी साहित्य के केंद्रमें नवगीत" के सवर्धन और सशक्तिकरण
के विविध आयामों से जुड़ने और सहभागिता निर्वहन हेतु !आपने लेख /और नवगीत
पढ़ा मुझे बहुत खुश हो रही है मेरे युवा मित्रों की सुन्दर सोच /भाव बोध /और
दृष्टि मेरे भारत माँ की आँचल की ठंडी ठंडी छाँव और सोंधी सोंधी मिटटी की
खुशबु अपने गुमराह होते पुत्रों को सचेत करती हुई माँ भारती ममता का स्नेह व
दुलार निछावर करने हेतु भाव बिह्वल माँ की करूँणा समझ पा रहे हैं और शनै
शैने अपने कर्म पथ पर वापसी के लिए अपने क़दमों को गति देने को तत्पर ...
रहने दो
छोडो
अभी देखा
कहाँ है अनचीन्हा
दम ख़म
आपने हमारा !
छेड़ें
अगर लय
हम अपने
गीतों की
नाचेगी नदिया
छोड़ कर किनारा !
औंध औंध
रेत और बालू में
खोज खोज चकमक
पानी में धूनी
सुलगाई है
गीतों की हमने,
बहते पहावों की
लकड़ी जुटाई
न उपले
खैरातों में पाई
सोंसों की समिधा
हवन किये सपने,
रोकेंगे
काने
कुटिल मछुआरे
कब तब तक
जाल में
सूरज अवारा !
रहने दो
छोडो
अभी देखा
कहाँ है अनचीन्हा
दम ख़म
आपने हमारा !
छेड़ें
अगर लय
हम अपने
गीतों की
नाचेगी नदिया
छोड़ कर किनारा !
कानाफूसी
कनातों की
उलझाती नजरें
विज्ञापन ओढ़े रुपहले
हंसते रहो
बडबोली मुस्काने,
रहने दो
पर्दों के पीछे हमें
महुओं की खोखल में
सुग्गों के जैसे
सुविधायें हम
भी तो जाने,
पखनों में
अपने
क्षितिज
हम भरेंगे
फकीरी अदा के
बहरे बंजारा !
रहने दो
छोडो
अभी देखा
कहाँ है अनचीन्हा
दम ख़म
आपने हमारा !
छेड़ें
अगर लय
हम अपने
गीतों की
नाचेगी नदिया
छोड़ कर किनारा !
फूल की तरह ही
उछाले हैं आपने
अंगारे जलते
जब तब
सतरंगी धोतियों की
भाव भरी उलियाँ,
फसलें भरी हैं
कविता की आपने
तुलसी कबीरा की
ड़ीहों की माटी
से निर्मित
बखारी कुठुलियाँ,
फिर भी
नहीं दिखता
अउनों से
झिरता
जुगुनुओं का
कर्पूरी उजियारा ! ४३
रहने दो
छोडो
अभी देखा
कहाँ है अनचीन्हा
दम ख़म
आपने हमारा !
छेड़ें
अगर लय
हम अपने
गीतों की
नाचेगी नदिया
छोड़ कर किनारा !
भोलानाथ
डॉराधा कृष्णन स्कूल के बगल में
अन अच्.-७ कटनी रोड मैहर
जिला सतना मध्य प्रदेश .भारत
संपर्क – ८९८९१३९७६३
No comments:
Post a Comment