Friday, 29 March 2013

भोलानाथ के नवगीत [जब तक तुम थे]

मेरे अपने सभी सुधि पाठक ,सुधि श्रोता और नवोदित, वरिष्ठ,तथा मेरे समय साथ के सभी गीतकार,नवगीतकार और साहित्यिक मित्रों को समर्पित आज का यह नवगीत फागुनी उमंगों का गीत है आशा करता हूँ ! आपको भी तरंगायित करने में सफल होगा !
साहित्यिक अर्ध रात्रि की सुन्दरतम शीतल बासंती बेला में निवेदित कर रहा हूँ !आपकी प्रतिक्रियाएं ही इस चर्चा और पहल को सार्थक दिशाओं का सहित्यिक बिम्ब दिखाने में सक्षम होंगी !

और आवाहन करता हूँ "हिंदी साहित्य के केंद्रमें नवगीत" के सवर्धन और सशक्तिकरण के विविध आयामों से जुड़ने और सहभागिता निर्वहन हेतु !आपने लेख /और नवगीत पढ़ा मुझे बहुत खुश हो रही है मेरे युवा मित्रों की सुन्दर सोच /भाव बोध /और दृष्टि मेरे भारत माँ की आँचल की ठंडी ठंडी छाँव और सोंधी सोंधी मिटटी की खुशबु अपने गुमराह होते पुत्रों को सचेत करती हुई माँ भारती ममता का स्नेह व दुलार निछावर करने हेतु भाव बिह्वल माँ की करूँणा समझ पा रहे हैं और शनै शैने अपने कर्म पथ पर वापसी के लिए अपने क़दमों को गति देने को तत्पर ...

जब तक तुम थे
पास हमारे
हंस हंस
फूले फूल परागी
ओंठ हंसी झरने !
छोड़ गये जब से
ठग ठग तुम
गोकुल की गलियाँ
पतरोई सा
हम भी लगे बिखरने !
ऊबे ऊबे चहरे
ऊबी हैं पहचाने
तितर बितर
दिखती हैं
ग्वालों की टोलियाँ,
यमुना की लहरों में
लिखते हैं हम भी
अँखियों संदेशे
पढ़ पढ़ के
कोयल की बोलियाँ,
रंग बिरंगे
छंद नहीं दिखते
मुरली बिन
पायल की भाषा
पल पल लगी अखरने !
जब तक तुम थे
पास हमारे
हंस हंस
फूले फूल परागी
ओंठ हंसी झरने !
छोड़ गये जब से
ठग ठग तुम
गोकुल की गलियाँ
पतरोई सा
हम भी लगे बिखरने !
माधव उद्धव से
कह दो और सुनायें ना
हमको अब
मथुरा के
चौपाली चर्चे,
केसरिया कानों में
छापें ना
रह रह
बिरहाकुल संशय के
कोई अब पर्चे,
भीतर नगरी
बाहर कस्वे
काँस कंटीले
बगियाँ बाग़
खेत सा लगे बखरने !
जब तक तुम थे
पास हमारे
हंस हंस
फूले फूल परागी
ओंठ हंसी झरने !
छोड़ गये जब से
ठग ठग तुम
गोकुल की गलियाँ
पतरोई सा
हम भी लगे बिखरने !
बंसवट बौराई
पवन पियासी
फुनगी बैठी
रो रो फोड़े
कांच के कंगना,
ओंठों की
मुँह भर मुस्कानें
सूख गई हैं
जैसे सूखे
महुआ अंगना,
छाती थाती
धरी हैं ताती
छवियाँ मोहक
आँखें देती
नहीं बिसरने !
जब तक तुम थे
पास हमारे
हंस हंस
फूले फूल परागी
ओंठ हंसी झरने !
छोड़ गये जब से
ठग ठग तुम
गोकुल की गलियाँ
पतरोई सा
हम भी लगे बिखरने !

भोलानाथ
डॉराधा कृष्णन स्कूल के बगल में
अन अच्.-७ कटनी रोड मैहर
जिला सतना मध्य प्रदेश .भारत
संपर्क – ८९८९१३९७६३

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