चिट्ठी पत्री
डाक डाकिया पत्र तार संदेशों केदिन रहे नहीं
समय है अब तो
मैसेज
मेल मिलन लाइव बतियाने का ।
बीते समय की
चिन्दी चिन्दी
वर्तमान का सूत सिये क्यों
कथरी गोदरी
सहज है
रेडीमेड विलास वस्तु ले आने का ।
खोंपा फेंक कंकड़ियों के
संकेतों का
आनंद निराला
रहे न कोतुहल
प्रेमालिंगन के वाजिब हिस्से,
लिखना
पढ़ना प्रेम पत्र का
बंद किताबों की
क्षेपक सी दबी चिट्ठियों के
संवेदित दिन
हो गये कहानी किस्से,
जीवन जितना सरल हुआ
भाग दौड़ का बढ़ रहा दायरा
कठिन बहुत है
मुह उमेठ
पलकें
झपकाकर घरी घरी इतराने का ।
बचत समय की
बहुत हुई
कर ली मुट्ठी में
दुनिया भर की
सारी क्रिया कलापें
जैसे चाहें वैसे भोगें,
पूंछ परख अनुनय अनुमति
हद बंदिश की
सीमायें टूटीं
बेदाग
बगुलिया रंगत बाहर
भीतर सौ सौ योगें,
उड़ती साँझ गौधूलि की
खटिया मचवा
फरका परछी परकोठों की
लुकाछिपी के
खेल उजड़ गये
शेष शहर शामियाने का ।
तारीफों के गुर गौरव
चिट्ठी के
अब अंश नहीं
मैसेज किये प्रश्नपत्र के
उत्तर नहीं
परिणामों का मेल मिले,
सुबह सुबेरे सुर्ख सुर्खियां
अखबारों की
पढ़ते पढ़ते
चाय की
चुस्की ओंठ से छूटे
कांपे हाथ गिलास हिले,
बदले युग में गारंटी वॉरंटी
नहीं किसी की
यूज थुरु का चलन
हुआ
स्वीकार सभी को
नहीं गिला गम गुठियाने का ।
भोलानाथ
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