Tuesday, 8 June 2021

खुली आंख का सपना है

खुली आंख का 

सपना है
बंद किये की वीरानी है !
क्या खोया
क्या पाया
जांगर जुगत जुबानी है !
तू अर्थ खोज न
जीवन का
वक़्त का पहिया
आगे आगे जाना है,
किया धरा
पीछे का गुल
बुझी राख में
लपट आग नहीं आना है,
रिव्यू देखकर
नाच न पगले
छूटी हुई कहानी है !
आत्मजयी
किरदारों का खालीपन
अर्जित श्रुति
कीरत कद तोल,
बगलगीर
अभ्यास पर्व की
पीठ गठरिया
गिन गिन गाठें खोल,
अर्जित रौनक
बड़ी बड़ाई
केवल अंध बयानी है !
बासी महक
न बांध नाक से
पग पग पथरीले पथ
रोप चमेली,
जैसे नदिया की
कलकल धारा में
लहरों की
नूतन अठखेली,
पूंछ न मतलब
सरेराह
हर तजबीज सयानी है !
भोलानाथ

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