बहो री बहो
ऊँचे ऊँचे बहो
रमती छाया की शीतल पवन !
पीपल की फुनगी
बरगद से ऊँचे
बांहों में भर भर गगन !
बहुरूपिये बादल की
चुलबुलिया छाया से उबा
उबासी में उबले जिया ,
कानों सुना कलकतिया कौतुक
अकारथ
कुल्फी के जैसे खाया पिया ,
झांसों दिलासों पले
ठग ठौरों के
भेदन का खोजो जतन !
बगिया के बगुले
समुन्दर न झांकें
डबरियों की लीलें मछरियाँ ,
वंशज शनि के जानें न
कथा व्यथा
मूक बाउर सी डूबती कछरियां ,
रोओ न सिसक सिसक
हिलको न धार देख
गाँव की नदी का पतन !
रटी राग गिद्धासन
पक्षकार पोंढकी का
अलट पलट पंखुआ खंगाले ,
आफत के मेलों की लाचारी
टेंट दबी
दौलत करती है हवाले ,
सौदों की सूची में
शामिल हैं
जस तस शव के ओढ़ाये कफ़न !
भोलानाथ
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