Sunday, 9 January 2022

पहरेदारी चेत

पहरेदारी चेत 

सचेत चौकियों के
संज्ञानो की
सेंध करेगी
हरदम साँस की चोरी !

पन पहचान की भूल हुई
तुमसे भी
अब चूक समय न
चाब चने खींसा के
मत कर मूडाफोरी!

धो कर देह
निकाल नाभि का मैल
मलाई लीप
गैल का गोबर घूरे डार
मत गिन घनी
देख तेल की धार,
कोल्हू बैल खली के मुद्दे
भूल बिसर पल भर
तिल की
घोंघा टिड्डी
पत्ते पत्ते
पड़ी जुरैयाँ मार,

अल्लाख्वाह अखाड़ा
मंत्र महंती
रार मची है
द्वारे द्वारे
भात का भूखा गैल अघोरी !

पेट पचे न कढ़ी
बेल को
हाथ पसारे
रोग विथा बीमारी के
रोक थाम के लिये
घोट घिस नीम पिला,
रोगी सुमिरैं
स्वाद दवा का फेर सुमरनी
उठ भिन्सारे
गावें गीत
बजावें ढोलक
लयसुर मूंड़ हिला,

मुह का मुस्का खोल न बोलें
लिख पढ़
सिख समझ कायदे
संस्कार के
छोड़ें दांत निपोरी !

हिचक छोड़
सब एक ओर धर
कृष्ण के जैसे बांस बंसुरिया
भेद न कर
साध सुदर्शन
काट कांद सी घीच,
चक्रव्यूह षड्यंत्रों के
नक़्शे नक्काशों की
जांच परख
तय कर फिर
सह शाजिस
ठौर ठिकाने फीच,

करिया कबरा फक्क सफेदी
झक्क दाग़ का
चिन्ह बचे न एक
धरती दामन
चमके खोरी खोरी !

भोलानाथ 

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