भरोसा करो
कानो पर अपने
कौये बहुत हैं
उपवन में अपने
तोड़ेंगे हरदम सुबेरे के सपने !
भ्रम की है बोली
संसय की आगी
दिल में लगाये
सांसें अभागी
पलके बिरौनी लगती हैं कपने !
ढेर लगे शिकवों के
अनचाहे प्रश्न चिन्ह
ओठों में कौंधे,
छुई मुई कल्पना
अनायास बर्फ हुई
बिम्ब सभी औंधे,
सुरसधी नागिन
नाच गई बीन पर
झूमता संपेरा
कच्ची अफीम पर
कहा सुनी प्यार लगा खपने !
भरोसा करो
कानो पर अपने
कौये बहुत हैं
उपवन में अपने
तोड़ेंगे हरदम सुबेरे के सपने !
भोलानाथ
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