Sunday, 2 June 2013

भोलानाथ के नवगीत [हिनहिनाते घोड़ों पर]

हिनहिनाते
घोड़ों पर
चढ़ कर
बात क्या करें !
गिरने के पहले
जमीन पर
हम
पाँव तो धरें !
हर बार
सम्हल
जाने की बातें
दादी और नानी से
बहुत सुनी,
मनमौजी
क़दमों ने
कीचड में पटका
लथपथ हैं
बात के गुनी,
खटमिट्ठे बेर
रह रह के
उसी
मोड़ में फरें !
हिनहिनाते
घोड़ों पर
चढ़ कर
बात क्या करें !
गिरने के पहले
जमीन पर
हम
पाँव तो धरें !

भोलानाथ

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