Monday, 14 October 2013

भोलानाथ के नवगीत [फूंकते रहे पुतले]

मेरे अपने सभी सुधि पाठक ,सुधि श्रोता और नवोदित, वरिष्ठ,तथा मेरे समय साथ के सभी गीतकार,नवगीतकार और साहित्यिक मित्रों को समर्पित आज का यह व्यवस्था का नवगीत
साहित्यिक संध्या की सुन्दरतम बेला में निवेदित कर रहा हूँ !आपकी प्रतिक्रियाएं ही इस चर्चा और पहल को सार्थक दिशाओं का सहित्यिक बिम्ब दिखाने में सक्षम होंगी !

और आवाहन करता हूँ "हिंदी साहित्य के केंद्रमें नवगीत" के सवर्धन और सशक्तिकरण के विविध आयामों से जुड़ने और सहभागिता निर्वहन हेतु !आपने लेख /और नवगीत पढ़ा मुझे बहुत खुश हो रही है मेरे युवा मित्रों की सुन्दर सोच /भाव बोध /और दृष्टि मेरे भारत माँ की आँचल की ठंडी ठंडी छाँव और सोंधी सोंधी मिटटी की खुशबु अपने गुमराह होते पुत्रों को सचेत करती हुई माँ भारती ममता का स्नेह व दुलार निछावर करने हेतु भाव बिह्वल माँ की करूँणा समझ पा रहे हैं और शनै शैने अपने कर्म पथ पर वापसी के लिए अपने क़दमों को गति देने को तत्........

ले कर
परिवर्तन की
नई नई ख्वाहिशें
आईं बहुत
मरुथल में वेगवती आंधियां !  
बोले नहीं
कुछ बदले नहीं
पाले रहे
आँस्तीनों में
जन्मों की व्याधियां !
फूंकते रहे पुतले
शीश कटे
पौरुष के
पर्व में दशहरों के
मूठों के मारे,
रूढ़ियों के
लंगड़े अपाहिज
पुरखों की
अर्जित थातियाँ 
हाथ शकुनियों के हारे,
नई नई
जूतियों ने
जरबों में पाँव धर
उगाई हैं
आँख भर केवल रतौधियाँ !
ले कर
परिवर्तन की
नई नई ख्वाहिशें
आईं बहुत
मरुथल में वेगवती आंधियां !  
बोले नहीं
कुछ बदले नहीं
पाले रहे
आँस्तीनों में
जन्मों की व्याधियां !
बीज बरगद का
चिंतन में डूबा
भाँप भाँप
कैक्टस की
पीर भरी अंतर ख़ामोशी,
घोड़ों ने खेत चरे
लबरों ने
लेबों में
भेजी है
जांच को लेंड़ी खरगोशी,
अंधी छलनाओं ने
सूरज को
खूब छला
बाबा वशिष्ठ की
पाकर के मानक उपाधियाँ !
ले कर
परिवर्तन की
नई नई ख्वाहिशें
आईं बहुत
मरुथल में वेगवती आंधियां !  
बोले नहीं
कुछ बदले नहीं
पाले रहे
आँस्तीनों में
जन्मों की व्याधियां !


 भोलानाथ
डॉराधा कृष्णन स्कूल के बगल में
अन अच्.-७ कटनी रोड मैहर
जिला सतना मध्य प्रदेश .भारत
9425885234

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